महाराष्ट्र की लाड़की बहिन योजना से 93 लाख महिलाएं बाहर, बजट भी घटाया
मुंबई– महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना’ में बड़े स्तर पर वेरिफिकेशन (Verification) के बाद करीब 92 लाख महिलाओं के नाम लाभार्थियों की लिस्ट से हटा दिए गए हैं। इसके साथ ही योजना के लगभग 38 फीसदी लाभार्थी बाहर हो गए हैं। महाराष्ट्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए लाडकी बहिन योजना का बजट 36,000 करोड़ रुपये से घटाकर 26,500 करोड़ रुपये कर दिया है।
सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, योजना शुरू होने के बाद लाभार्थियों की संख्या करीब 2.43 करोड़ तक पहुंच गई थी। लेकिन अब यह करीब 1.5 करोड़ रह गई है। सरकार ने सितंबर 2025 से राज्यभर में लाभार्थियों का सत्यापन अभियान शुरू किया था। जांच में सबसे बड़ा कारण अनिवार्य eKYC पूरा नहीं करना सामने आया।
करीब 62 लाख महिलाओं के नाम केवल eKYC पूरा नहीं करने की वजह से हटाए गए। यह कुल हटाए गए लाभार्थियों का लगभग 67 फीसदी है। ये अनिवार्य इलेक्ट्रॉनिक ‘नो योर कस्टमर’ (eKYC) ऑथेंटिकेशन प्रक्रिया को पूरा करने में विफल रहे।
सत्यापन में कई अन्य वजहें भी सामने आईं, जिनके आधार पर लाभार्थियों को अपात्र घोषित किया गया। 16 लाख परिवारों की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये की निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई। 4.42 लाख महिलाओं ने बताया कि वे या उनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी कर्मचारी है।
करीब 3.6 लाख लोग पहले से संजय गांधी निराधार योजना का लाभ ले रहे थे। 2.5 लाख मामलों में एक ही परिवार के दो से अधिक सदस्य योजना का लाभ ले रहे थे। 1.8 लाख महिलाओं की उम्र 65 वर्ष से अधिक पाई गई।
करीब 29 हजार पुरुष और 8 हजार सरकारी कर्मचारी भी योजना का लाभ लेते पाए गए, जबकि वे पात्र नहीं थे। जिन लाभार्थियों के नाम बाद में हटाए गए, उन्हें पहले ही मिलाकर करीब 14,000 करोड़ रुपये की सहायता राशि दी जा चुकी थी। महिला एवं बाल विकास मंत्री आदिति तटकरे ने कहा कि योजना जून 2024 में शुरू हुई थी और शुरुआती दो किस्तें अगस्त 2024 में जारी की गई थीं।
इस बीच नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में भी योजना के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाए गए हैं। योजना पर 33,237.24 करोड़ रुपये खर्च किए गए। जबकि स्वीकृत बजट 29,693.09 करोड़ रुपये था। यानी 3,541.16 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च हुआ। CAG ने यह भी कहा कि बड़ी रकम निकाली गई लेकिन उसे तुरंत खर्च करने के बजाय जमा खातों में रखा गया, जो वित्तीय अनुशासन के विपरीत है।

