म्यूचुअल फंड से एक साल में जुड़े 3.94 करोड़ निवेशक, कुल फोलियो 27 करोड़

मुंबई- एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, उद्योग में नए फोलियो जुड़ने में रिटेल निवेशकों का दबदबा लगातार बना हुआ है। वहीं, इक्विटी स्कीमें निवेशकों की पहली पसंद बनी हुई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान म्युचुअल फंड उद्योग में निवेशकों की भागीदारी लगातार बढ़ी। 31 मार्च 2026 तक म्युचुअल फंड फोलियो की संख्या बढ़कर 27.39 करोड़ पहुंच गई। पूरे वित्त वर्ष में करीब 3.94 करोड़ नए फोलियो जुड़े।

इससे पहले, वित्त वर्ष 2024-25 में फोलियो की संख्या 17.79 करोड़ से बढ़कर 23.45 करोड़ हो गई थी, जो 32% की उल्लेखनीय वृद्धि थी। यह आंकड़ा दर्शाता है कि म्युचुअल फंड में निवेशकों की भागीदारी लगातार मजबूत हो रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, इक्विटी-ओरिएंटेड स्कीमें फोलियो ग्रोथ की सबसे बड़ी वजह बनी रहीं। कुल फोलियो में इनकी हिस्सेदारी करीब 66.71 फीसदी रही। वहीं, वर्ष के दौरान सभी ओपन-एंडेड फंड कैटेगरी में फोलियो की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई।

हालांकि, पैसिव फंड फोलियो ग्रोथ के मामले में सबसे तेजी से बढ़ने वाला सेगमेंट रहा। इस कैटेगरी में 38.13 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। यह दर्शाता है कि रिटेल निवेशकों का रुझान तेजी से इंडेक्स-आधारित और कम लागत वाले निवेश उत्पादों की ओर बढ़ रहा है। 2025-26 में एक्टिव डेट फंड्स के फोलियो में 19.20 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जो एक्टिव इक्विटी फंड्स की 11.54 फीसदी की वृद्धि से ज्यादा रही।

म्युचुअल फंड उद्योग का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) वित्त वर्ष 2025-26 के अंत में नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। मार्च 2026 तक उद्योग का कुल AUM बढ़कर 73.73 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि मार्च 2025 के अंत में यह 65.74 लाख करोड़ रुपये था। इस तरह एक साल में AUM में 12.15% की वृद्धि दर्ज की गई।

वित्त वर्ष के दौरान फरवरी 2026 में म्युचुअल फंड उद्योग का AUM करीब 82 लाख करोड़ रुपये के ऑल टाइम हाई तक पहुंच गया था। हालांकि, बाद में बाजार में उतार-चढ़ाव के चलते इसमें कुछ नरमी देखने को मिली।

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