SpaceX ला रही है इतिहास का सबसे बड़ा IPO, जुटाएगी 75 अरब डॉलर की रकम

मुंबई- एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) वॉल स्ट्रीट के सबसे बड़े आईपीओ में से एक लाने की तैयारी कर रही है। कंपनी 555.6 मिलियन शेयर 135 डॉलर प्रति शेयर के भाव पर बेचकर करीब 75 अरब डॉलर जुटाने की योजना बना रही है। अगर आईपीओ इसी कीमत पर आता है, तो स्पेसएक्स की कुल वैल्यू करीब 1.75 ट्रिलियन डॉलर हो सकती है। कंपनी के शेयर 12 जून से नैस्डैक पर ट्रेडिंग शुरू कर सकते हैं, जबकि अंतिम इश्यू प्राइस 11 जून को तय होने की उम्मीद है।

स्पेसएक्स के करीब 30 फीसदी इश्यू यानी लगभग 22.5 अरब डॉलर के शेयर रिटेल निवेशकों के लिए आरक्षित रखे गए हैं। फिडेलिटी, रॉबिनहुड, सोफाई, चार्ल्स श्वाब और ई-ट्रेड जैसे प्लेटफॉर्म अपने ग्राहकों को इस आईपीओ में निवेश का मौका दे सकते हैं। हालांकि अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर न्यूनतम निवेश की शर्तें अलग हैं।

भारतीय निवेशकों के लिए सीधे आईपीओ में निवेश करना आसान नहीं होगा। अमेरिका की आईपीओ प्रक्रिया भारत की ASBA व्यवस्था से अलग है और विदेशी खुदरा निवेशकों को आमतौर पर सीधे आईपीओ में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं मिलती। इस वजह से भारतीय निवेशकों को शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद ही स्पेसएक्स के शेयर खरीदने का मौका मिलेगा।

स्पेसएक्स के शेयर बाजार में लिस्ट होने के बाद भारतीय निवेशक लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत विदेशी ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म के जरिए शेयर खरीद सकते हैं। इसके लिए निवेशकों को अंतरराष्ट्रीय निवेश प्लेटफॉर्म पर खाता खोलना होगा, विदेश में पैसा भेजना होगा और फिर नैस्डैक पर लिस्टेड शेयरों में निवेश करना होगा। इसके अलावा कुछ ग्लोबल फीडर फंड्स, विदेशी ETF और GIFT सिटी के जरिए भी अप्रत्यक्ष निवेश का विकल्प मिल सकता है। हालांकि फिलहाल उपलब्ध ज्यादातर फंड्स में स्पेसएक्स शामिल नहीं है, लेकिन

विशेषज्ञों का कहना है कि स्पेसएक्स में निवेश के साथ कुछ बड़े जोखिम भी जुड़े हुए हैं। कंपनी की सफलता काफी हद तक एलन मस्क पर निर्भर है, जो टेस्ला समेत कई अन्य कंपनियां भी संभालते हैं। इसके अलावा कंपनी की आय का एक बड़ा हिस्सा अमेरिकी सरकारी एजेंसियों से आता है। स्टारलिंक को अलग-अलग देशों में नियामकीय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

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