एलआईसी की ले रहे पॉलिसी तो सावधान, एक लाख में एजेंट का कमीशन 28 हजार

अजीत सिंह

मुंबई। बीमा नियामक इरडाई के कमीशन घटाने के कंसल्टेंट पेपर ने बीमा इंडस्ट्री में खलबली मचा दी है। इससे न सिर्फ बीमा कंपनियों की नींद उड़ी है बल्कि इनके एजेंटों और मध्यस्थों के भी कारोबार में असर होगा। बीमा कंपनियां इतना कमीशन लेती हैं कि आपके फायदे पर इसका सीधा असर पड़ता है। खासकर एलआईसी को पहले साल में 28 पर्सेंट तक कमीशन देती है।

आंकड़े बताते हैं कि एलआईसी की अगर आप पॉलिसी लेते हैं तो इसके एजेंट को आपकी रकम पर जिंदगी भर कमीशन मिलता है। पहले साल में यह कमीशन 28 पर्सेंट तक होता है। यानी एक लाख रुपये का आपने निवेश किया तो इसका मतलब आपका निवेश केवल 72,000 रुपये होता है और 28,000 रुपये का कमीशन एजेंट को चला जाता है।

एलआईसी के एलीट क्लब में 42 एजेंट, गैलेक्सी में 291, कारपोरेट क्लब में 387 एजेंट, चेयरमैन क्लब में 45208 एजेंट और जोनल मैनेजर क्लब में 35,586 एजेंट हैं। 2025-26 में एलआईसी ने कुल 24,440 करोड़ रुपये का कमीशन इन एजेंटों को दिया है। उसके पहले के साल में यह कमीशन 25,309 करोड़ रुपये था।

इसमें से फर्स्ट ईयर कमीशन 9317 करोड़ रुपये था। रिन्यूएल प्रीमियम के रूप में 14,136 करोड़ रुपये का कमीशन एजेंटों को दिया गया । सिंगल प्रीमियम के तहत 952 करोड़ रुपये का कमीशन दिया गया।

बात यहीं खत्म नहीं होती है। एजेंट जिंदगी भर कमीशन लेता है। उदाहरण के तौर पर वह पहले साल तो 28 पर्सेंट लेता है, लेकिन दूसरे और तीसरे साल यह कमीशन 7.5 पर्सेंट हो जाता है। यानी आपका निवेश पर फायदा हो या न हो, एजेंट का कमीशन पक्का मिलता है। इसके बाद चौथे साल और इससे आगे जब तक आपका निवेश रहेगा, एजेंट को 5 से 7 पर्सेंट तक कमीशन मिलता है। हालात यह है कि एलआईसी के एजेंट उसके चेयरमैन से ज्यादा कमाई करते हैं। सालाना 50 करोड़ रुपये तक की कमाई आपके पैसे से कर रहे हैं।

अब यह एजेंट को कमीशन किससे मिलता है। यह कमीशन आपके निवेश से जाता है। आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 यानी 31 मार्च, 2026 तक एलआईसी के पास 14.57 लाख एजेंट थे। इसके पहले के वर्ष में यह संख्या 14.86 लाख थी। हालांकि 2025-26 में एलआईसी ने 2.66 लाख नए एजेंट नियुक्त किए फिर भी इसके एजेंटों की संख्या में भारी कमी आई है।

5 साल में बीमा सेक्टर को मैनेजमेंट खर्च घटाकर 12.5% तक करना होगा

सेक्टरमौजूदा सीमा2 साल में लक्ष्य5 साल में लक्ष्य
लाइफ इंश्योरेंस30%15%12.5%
जनरल इंश्योरेंस30%25%20%

वर्तमान में इंश्योरेंस कंपनियों के लिए मैनेजमेंट खर्च की सीमा 30% तक है। बीमा नियामक ने इसे चरणबद्ध तरीके से कम करने का प्रस्ताव दिया है।

IRDAI का मानना है कि 2023 में कंपनियों को खर्चों में जो छूट दी गई थी, उससे ग्राहकों को कोई फायदा नहीं मिला। कंपनियां प्रीमियम तो बढ़ाती रहीं, लेकिन ग्राहकों की संख्या नहीं बढ़ी।

IRDAI के मुताबिक 2023 में कंपनियों को खर्चों में छूट दी गई थी ताकि पॉलिसियां सस्ती हों और ज्यादा लोग बीमा कराएं, लेकिन इसके उलट प्रीमियम महंगा होता गया। कंपनियों का बिजनेस बढ़ाने से ज्यादा ध्यान डिस्ट्रीब्यूटर्स को भारी कमीशन बांटने पर रहा।

कॉर्पोरेट एजेंट्स: 2023 से 2025 के बीच न्यू बिजनेस प्रीमियम में 28% की ग्रोथ हुई, जबकि डिस्ट्रीब्यूटर्स का कमीशन 125% बढ़ गया। पहले साल के प्रीमियम का करीब 27% हिस्सा कमीशन में चला जाता है। इसके अलावा इंसेंटिव्स अलग से मिलते हैं।

ब्रोकर्स: जनरल इंश्योरेंस में ब्रोकर्स के जरिए आने वाला प्रीमियम 37% बढ़ा, लेकिन उनका कमीशन 173% तक चढ़ गया। औसत ब्रोकर कमीशन 8.5% से बढ़कर 17% हो गया।

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