आईडीबीआई के नए मालिक घर घर बेचते थे पंखे, हैदराबाद से 64 रुपये लेकर गए थे कनाडा
मुंबई- भारतवंशी कनाडाई बिजनेसमैन प्रेम वत्स कभी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए घर-घर जाकर एयर कंडीशनर बेचते थे। अब वे दुनिया के बड़े निवेशकों में गिने जाते हैं। हैदराबाद में जन्मे वत्स को कनाडा में एक नई पहचान मिली। उन्होंने फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को वैश्विक बीमा एवं निवेश समूह में बदल दिया। अब उनकी कंपनी भारत के बैंकिंग सेक्टर में बड़ा कदम उठाने जा रही है। फेयरफैक्स को IDBI बैंक में 60.72% हिस्सेदारी खरीदने के लिए ₹52,878 करोड़ की बोली पर सरकार की मंजूरी मिली है।
दरअसल, कनाडाई मूल की दिग्गज कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की सहायक कंपनी ‘एम/एस 10955230 कनाडा इंक’ (M/s 10955230 Canada Inc.) 81 प्रति शेयर की दर पर सरकार से 52,878 करोड़ रुपये में 60.72% हिस्सेदारी खरीदने जा रही है।
प्रेम वत्स का जन्म 5 अगस्त 1950 को हैदराबाद में हुआ था। उन्होंने 1971 में IIT मद्रास से केमिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। इसके बाद वह कनाडा चले गए और वेस्टर्न ओंटारियो यूनिवर्सिटी से MBA किया। उनके इस फैसले ने उनकी सोच और जीवन की दिशा ही बदल दी।
साल 1974 में उन्होंने कन्फेडरेशन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में नौकरी शुरू की। यहां उन्होंने निवेश और शेयर बाजार की बारीकियां सीखीं। कुछ साल बाद उन्होंने अपनी निवेश कंपनी शुरू की और साल 1985 में फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की स्थापना की। उन्हें ‘कनाडा का वॉरेन बफेट’ भी कहा जाता है।
प्रेम वत्स जब कनाडा पहुंचे, तो उनके पास सिर्फ 8 डॉलर थे। कहा जाता है कि उस समय इसकी कीमत 64 रुपये थी। विदेश में अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने और रहने-खाने का इंतजाम करने के लिए उन्होंने कभी काम को छोटा नहीं समझा।
उन्होंने एक होम अप्लायंसेज कंपनी के उपकरण डोर-टू-डोरजाकर बेचे। वे यूनिवर्सिटी में क्लास अटैंड करते, फिर भागकर काम पर जाते और फिर देर रात तक पढ़ते थे। चुनौतियों का डटकर मुकाबला किया और सफलतापूर्वक अपनी मास्टर्स डिग्री पूरी की। कुल मिलाक उन्होंने मुश्किलों के सामने हार नहीं मानी।
फोर्ब्स के अनुसार, प्रेम वत्स की संपत्ति करीब 2.6 अरब डॉलर आंकी गई है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 24800 करोड़ रुपये है। हालांकि, अरबपतियों की संपत्ति शेयर बाजार और निवेशों के मूल्य में बदलाव के साथ घटती-बढ़ती रहती है। वह कनाडा के सबसे अमीर भारतीयों में शामिल हैं।
साल 2019 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने IDBI को प्राइवेट बैंक की कैटेगरी में डाल दिया था क्योंकि तब LIC ने इसमें 51% की हिस्सेदारी खरीद ली थी। अब चूंकि केंद्र सरकार और LIC दोनों ही सार्वजनिक क्षेत्र में आते हैं इसलिए इसे व्यवहारिक रूप से सरकारी बैंक ही माना जाता रहा।

