चांदी होगी और महंगी, चार लाख रुपये तक जा सकता है भाव, यह है कारण
मुंबई- वैश्विक अनिश्चितताओं और बढ़ती इंडस्ट्रियल मांग ने चांदी को इस साल आसमान पर पहु्ंचा दिया था। अब यह चार लाख रुपये तक जा सकती है। यानी मौजूदा भाव की तुलना में इसमें जबरदस्त तेजी आने वाली है।
जनवरी में चांदी अपने लाइफटाइम हाई 3.84 लाख रुपये तक पहुंच गई थी। हालांकि, उसके बाद इसमें तेज गिरावट भी आई लेकिन फिर पिछली दिवाली से 17 सितंबर तक इसका रिटर्न 50 परसेंट से ऊपर ही रहा। अब एनालिस्ट मान रहे हैं कि यह गिरावट के बाद रिकवरी का दौर है।
केडिया एडवाइजरी का कहना है कि अगले साल दिवाली से पहले चांदी 4 लाख रुपये प्रति किलो का आंकड़ा छू सकती है। वहीं, इंटरनेशनल मार्केट में अगले साल तक यह 120 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। वहीं, अगले 6 महीने में इसके $85–90 प्रति औंस तक पहुंचने की उम्मीद है। इन्वेस्टमेंट फर्म ने कीमतों में संभावित उछाल के पीछे कई कारण बताए हैं।
केडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में वैश्विक सिल्वर मार्केट में मांग के मुकाबले करीब 4.63 करोड़ औंस चांदी कम पड़ेगी। 2025 में यह डेफिसिट 4.03 करोड़ औंस था। रिपोर्ट के मुताबिक, यह लगातार छठा साल होगा जब चांदी की मांग सप्लाई से अधिक रह सकती है। आपूर्ति कम होने के पीछे सबसे बड़ी वजह सुस्त माइनिंग एक्टिविटी है। बता दें कि 2025 में 84.66 करोड़ औंस चांदी माइन की गई थी. वहीं, इस साल यह 84.41 करोड़ औंस रह सकती है। यानी सप्लाई बढ़ने की बजाय घट गई लेकिन मांग में तेजी आ गई जिससे इसकी कीमतों को बल मिलेगा।
भारतीय निवेशकों की चांदी में दिलचस्पी बढ़ी है। लोग गोल्ड के साथ-साथ अब चांदी को भी बेहतरीन निवेश विकल्प के तौर पर देख रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ETF के जरिए बड़े स्तर पर चांदी में पैसा लगाया जा रहा है। बीते अगस्त सिल्वर ETF में करीब ₹1,271 करोड़ का नेट इनफ्लो आया, जबकि जुलाई में यह करीब ₹1,285 करोड़ था। बता दें कि अगस्त के अंत तक सिल्वर ETF का AUM लगभग ₹85,488 करोड़ पहुंच गया था।
रिपोर्ट में सिल्वर के लिए कई जोखिमों को भी चिन्हित किया गया है। इनमें ब्याज दरों में सख्ती, औद्योगिक मांग में कमजोरी, सिल्वर की जगह दूसरे पदार्थों का इस्तेमाल, प्रति यूनिट सिल्वर की कम होती खपत, माइन और रीसाइक्लिंग सप्लाई में बढ़ोतरी तथा निवेशकों के फंड फ्लो में बदलाव शामिल हैं। इसके अलावा, रिपोर्ट के अनुसार लंदन में सिल्वर इन्वेंटरी में बढ़ोतरी होने पर तत्काल सप्लाई की कमी खत्म हो सकती है जो कीमतों को नीचे धकेलेगी।

