त्योहारों से पहले महंगाई का तड़का, खाने के तेल की कीमतें 10 फीसदी बढ़ेंगी
मुंबई- आयातित खाद्य तेल की भरमार होने के कारण फिलहाल खाद्य तेलों के दाम भले दबाव में है। लेकिन दबाव से निकलने के लिए खाद्य तेल कंपनियों ने कीमतों में 10 फीसदी बढ़ोत्तरी का मन बना लिया है। आगामी त्योहारी सीजन में कीमतें बढ़ सकती हैं।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 58% खाद्य तेल आयात करता है, जिससे वैश्विक बाजार में होने वाली हलचल का सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ता है। यदि त्योहारी सीजन में खाद्य तेलों का दाम बढ़ाए जाते हैं तो मार्च के बाद से यह तीसरा इजाफा होगा। मार्च से जून के बीच दो बार 5-6 प्रतिशत की वृद्धि की गई और इस तरह खाद्य तेलों के दाम में कुल मिलाकर 10-12 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हो गई। क्रूड खाद्य तेलों का आयात महंगा बैठ रहा है क्योंकि वैश्विक बाजार में भाव ऊंचा होने के साथ जहाजों का किराया अधिक पड़ रहा है।
कीमतों पर यह नया दबाव कच्चे खाने वाले तेलों की ज्यादा आयात लागत की वजह से है। शिपमेंट खर्च में बढ़ोत्तरी हो गई है और डॉलर के सापेक्ष रुपए का मूल्य काफी घट गया है। इससे भारतीय प्रोससेर्स एवं रिफाइनर्स के मार्जिन में काफी कमी आ गई है और इसलिए उसे खाद्य तेलों का दाम बढ़ाने के लिए विवश होना पड़ सकता है। 23 सितंबर को कांडला बंदरगाह तक पहुंचने पर पामोलिन लैंडेड कॉस्ट 1494 रुपये प्रति 10 किलोग्राम हो रही है जबकि जबकि कांडला का स्पॉट कोटेशन 1474 रुपये का मिल रहा है।
इस तरह सोया-रिफाइंड की लैंडेड कॉस्ट 1517 रुपये पड़ रही है जबकि स्पॉट कोटेशन 1415 रुपये का मिल रहा है। कमजोर रुपये, बढ़ा हुआ ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट और इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ने से दुनिया भर में वेजिटेबल ऑयल की कीमतें बढ़ी हैं, जिसने रिफाइनरों और प्रोसेसर्स पर बोझ बढ़ा दिया है । इमामी ग्रुप के निदेशक आदित्य अग्रवाल ने कहा कि कच्चे खाने वाले तेल की लैंडेड कॉस्ट लगभग 8 से 11% बढ़ गई है. हो सकता है कि कंपनियों के पास इस लागत को ग्राहकों पर डालने के अलावा कोई और विकल्प न बचे।
ऊंचे आयात खर्च, रुपए की कमजोर विनिमय दर एवं वैश्विक बाजार के दबाव के कारण भारतीय कंपनियों द्वारा पीक त्यौहारी सीजन (दशहरा-दीपावली) से पूर्व खाद्य तेल की कीमतों में बढ़ोत्तरी किए जाने की संभावना है। हालांकि सरकार तेलों पर आयात शुल्क में कटौती करती है तो कीमतों में सीमित वृद्धि ही हो पाएगी। बाजार में चर्चा है कि महंगाई को काबू में करने के लिए सरकार खाद्य तेल के आयात पर शुल्क कम कर सकती है। यही वजह से कारोबारी स्टॉक बढ़ाने से बच रहे हैं जिसके कारण कांडला बंदरगाह पर आयातित खाद्य तेल लागत से कम पर बिक रहा है।

