लोढ़ा डेवलपर्स की वैल्यू 32 प्रतिशत और डीएलएफ के वैल्यूएशन में 29 फीसदी की कमी

मुंबई- एक तरफ जहां अडाणी प्रॉपर्टीज ने लंबी छलांग लगाई, वहीं दूसरी तरफ लिस्टेड डेवलपर्स के लिए यह साल काफी मुश्किलों भरा रहा। DLF की वैल्यूएशन में सालाना आधार पर 29.3% की गिरावट आई और यह घटकर 1.46 लाख करोड़ रुपए रह गई।

हालांकि, इस बड़ी गिरावट के बावजूद DLF ने रैंकिंग में अपनी टॉप पोजीशन बरकरार रखी है और यह भारत की सबसे वैल्यूएबल रियल एस्टेट कंपनी बनी हुई है। रैंकिंग में दूसरे नंबर पर लोढ़ा डेवलपर्स है। हालांकि, इसकी वैल्यूएशन में 32.2% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिसके बाद इसकी वैल्यू 93,700 करोड़ रुपए रह गई है।

इंडियन होटल्स कंपनी 13.9% की गिरावट के साथ 93,300 करोड़ रुपए की वैल्यूएशन के साथ तीसरे नंबर पर है। ओयो (प्रिज्म) 106.8% की भारी बढ़त के साथ 67,200 करोड़ रुपए की वैल्यू लेकर 5वें नंबर पर आ गई है। हुरून की इस रिपोर्ट ने देश के ओवरऑल रियल एस्टेट सेक्टर की सुस्ती को भी उजागर किया है। लिस्ट में शामिल सभी 151 कंपनियों की कुल वैल्यूएशन सिर्फ 2% बढ़कर 16.5 लाख करोड़ रुपए ही हो सकी है।

यह पिछले 9 साल (जब से ये रैंकिंग शुरू हुई है) में सबसे धीमी ग्रोथ रेट है। इसके मुकाबले पिछले साल की लिस्ट में 14% की मजबूत ग्रोथ देखी गई थी। ग्रोहे-हुरून इंडिया रियल एस्टेट रिच लिस्ट में गौतम अडाणी और उनका परिवार पहली बार नंबर-1 पोजीशन पर पहुंच गया।

अडाणी प्रॉपर्टीज की वैल्यू में इस साल 38,000 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई है। साथ ही उन्होंने इस मामले में डीएलएफ के राजीव सिंह को पीछे छोड़ दिया है। 2026 की ग्रोहे-हुरून इंडिया रियल एस्टेट 150 रिपोर्ट के मुताबिक, अडाणी प्रॉपर्टीज इस साल भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में सबसे ज्यादा वैल्यू जोड़ने वाली कंपनी बनकर उभरी है। सालाना आधार पर कंपनी की वैल्यूएशन 72.5% बढ़कर 90,400 करोड़ रुपए पर पहुंच गई है।

वैल्यूएशन में आए इस तेज उछाल के कारण गौतम अडाणी और उनकी फैमिली हुरून इंडिया रियल एस्टेट रिच लिस्ट में पहले नंबर पर आ गई है। अडाणी फैमिली की रियल एस्टेट वेल्थ सालाना आधार पर 73% बढ़कर 90,400 करोड़ रुपए हो गई है। यह रैंकिंग अडाणी प्रॉपर्टीज में इस फैमिली की पूरी 100% ओनरशिप को दर्शाती है।

इस साल लिस्ट में शामिल सिर्फ 31 कंपनियों की वैल्यू में बढ़ोतरी हुई, जबकि 74 कंपनियों को गिरावट का सामना करना पड़ा। इस दौरान सभी कंपनियों की कुल वैल्यू सिर्फ ₹34,300 करोड़ रही, जो पिछली बार के ₹1.4 लाख करोड़ के मुकाबले बहुत कम है। गौर करने वाली बात यह है कि इस कुल वैल्यू क्रिएशन का करीब दो-तिहाई (2/3) हिस्सा अकेले अडाणी प्रॉपर्टीज और प्रिज्म (ओयो) ने मिलकर बनाया है, जो दिखाता है कि मुनाफा सिर्फ गिने-चुने प्लेयर्स के पास ही सिमट कर रह गया है।

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