कांग्रेस के लिए सुनहरा मौका, एसी में बैठकर नहीं होगा पलटवार

इस समय देश में कुछ ऐसे मुद्दे हैं जो लगातार 12 साल से सत्ता में बाहर बैठी कांग्रेस को एक बेहतर स्थिति में ला सकती है। भले ही लोकसभा चुनाव 2029 में होने हैं, लेकिन उनसे पहले राज्यों के विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए इस समय बहुत सारे मुद्दे हैं जो कांग्रेस को सत्ता में वापसी के लिए सहारा दे सकते हैं। लेकिन इसके लिए कांग्रेस को एसी कमरे से बाहर निकलकर मैदान में उतरने की रणनीति बनानी होगी और जमकर पसीना बहाना होगा।

हालांकि, विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने जरूर इसका बिगुल फूंका, लेकिन वह नाकाफी है। दरअसल नीट सहित परीक्षा के लीक हो रहे पेपर, बिहार में भरत तिवारी की हत्या और राम मंदिर में भयंकर चंदा चोरी जैसे कुछ ऐसे मुद्दे हैं जो हिंदीभाषी पट्‌टी में कांग्रेस की वापसी के लिए बहुत अच्छे मौके हैं। इसके साथ ही उत्तर भारत में भी कांग्रेस मजबूत होगी। लेकिन यह रणनीति बनाने के साथ दूसरी लाइन के नेताओं को भी भरोसे में लेना होगा।

यह सब ऐसे मुद्दे हैं जो सीधे तौर पर देश के युवाओं को जोड़ते हैं। युवा जिस तरफ जाएगा, उस तरफ की ही पार्टी को सत्ता में वापसी करने में मदद मिलेगी। राजस्थान के कोटा में हमने राहुल गांधी को देखा। कोटा ऐसे परीक्षार्थियों का गढ़ रहा है और राहुल गांधी ने बहुत ही सोच समझकर उस स्थान का चयन किया। लेकिन बात इतने से नहीं बनने वाली। राहुल गांधी को चाहिए कि वे युवा नेताओं को लेकर उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक के राज्यों के जो भी केंद्र शिक्षा के प्रमुख हैं, वहां पर इस तरह का आंदोलन करें। चाहे वह प्रयागराज हो, वाराणसी हो, पटना हो, कोटा हो, भोपाल हो, पुणे हो, बंगलूरू, हैदराबाद सहित अन्य शहरों में इस आंदोलन की धार को तेज करनी होगी। युवाओं से मिलना होगा। उनकी दिक्कतें समझनी होगी। उनको समझाने के साथ उनको भरोसा देना होगा कि देश के भ‌विष्य के साथ कांग्रेस पार्टी है। और सिर्फ भविष्य ही क्यों, उनके करियर से लेकर उनकी जिंदगी को संवारने में वह मदद करेगी।

परीक्षा के प्रश्नपत्रों का लीक होना कोई छोटा मोटा मामला नहीं है। यह सालों से लीक हो रहा है। लेकिन सरकार है कि इस पर चुप बैठी है। वह इसलिए क्योंकि उसके साथ विपक्षा पार्टियां भी आराम से एसी कमरे में बैठी हैं। उनको छात्रों की मेहनत नहीं दिख रही है। पर अगर सत्ता में वापसी करना है तो इसे एक जनआंदोलन बनाना होगा।

दूसरा मामला, राम मंदिर में भयंकर चोरी का है। जिस तरह से यह चोरी हुई है, वह अपने आप में पहला मामला है। भारत में धर्म एक बहुत बड़ा आस्था का केंद्र और खासकर अयोध्या में राम मंदिर हर जन जन से जुड़ा मामला है। फिलहाल इस चोरी में एसआईटी ने सात पेन ड्राइव में रिपोर्ट सौंप दी है, लेकिन सत्तारूढ़ पार्टी इसमें कोई कार्रवाई करेगी, यह आसान नहीं है। क्योंकि ट्रस्ट में सारे लोग सत्तारूढ़ पार्टी के हैं और राज्य के साथ केंद्र में सरकार भी भाजपा है। ऐसे में कार्रवाई करना आसान नहीं है।

कांग्रेस को चाहिए कि इस पर एक बेहतर रणनीति बनाकर इसे जनता के बीच ले जाना चाहिए। कहा जा रहा है कि पहले हर दिन 12 लाख रुपये का चढ़ावा आता था। चोरी के बाद से यह घटकर एक लाख रह गया. यानी जनता पूरी तरह से नाराज है। कांग्रेस को चाहिए कि वह इसके लिए भी देशव्यापी आंदोलन छेड़े। भाजपा का सबसे मजबूत पहलू ही मंदिर और राम हैं। और अगर वहां इतने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है तो उसे जनता के बीच ले जाना चाहिए। इसका बहुत बड़ा फायदा मिल सकता है।

तीसरा मामला भरत तिवारी की हत्या है। भरत तिवारी की हत्या एक सोची समझी रणनीति है। यह एनकाउंटर नहीं है। केंद्र में मंत्री जीतन राम मांझी ने बिहार पुलिस के पक्ष में ट्वीट कर साबाशी दी है। बिहार की जनता में गुस्सा उबाल पर है। जिस तरह से भरत तिवारी की अंतिम यात्रा में लोगों का हुजूम दिखा, उससे यह पता चलता है कि बिहार की जनता में इसके प्रति बहुत नाराजगी है। यह घटना वैसे भी अपने आप में संदेहजनक है। अगर भरत तिवारी ने सरेंडर कर दिया तो फिर हत्या करने का क्या औचित्य था। इसलिए कांग्रेस को चाहिए कि वह अगले साल उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के साथ 2029 के लोकसभा चुनाव तक इन सभी मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाए।

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