महंगाई डायन ने फिर उठाया सिर, लगातार पांचवें महीने बढ़कर, 4 फीसदी के करीब
मुंबई- देश में खुदरा महंगाई की रफ्तार फिर बढ़ गई है। मई में यह बढ़कर 3.93% पर पहुंच गई है, जो अप्रैल में 3.48% थी। पिछले 5 महीनों में यह पहली बार है जब खुदरा महंगाई रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के टारगेट 4% के बेहद करीब पहुंच गई है।
2026 की शुरुआत में महंगाई दर काफी कम थी। जनवरी में यह 2.74% के स्तर पर थी। मासिक आधार पर कीमतों में आया यह उछाल पिछले 16 महीनों में सबसे तेज है, जो दिखाता है कि बाजार में लगातार प्राइस प्रेशर बढ़ रहा है।
इस बार भी महंगाई बढ़ने के पीछे सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की चीजों के दामों में आई तेजी है। मई में कंज्यूमर फूड इन्फ्लेशन बढ़कर 4.78% पर पहुंच गया, जो अप्रैल में 4.20% था।
खास बात यह है कि शहरों के मुकाबले ग्रामीण भारत में खाद्य महंगाई दर ज्यादा रही। मई में ग्रामीण इलाकों में फूड इन्फ्लेशन 4.85% दर्ज किया गया, जबकि शहरी केंद्रों में यह आंकड़ा 4.66% रहा। इस बार कमोडिटी और डिस्क्रीशनरी (गैर-जरूरी) खर्चों में सबसे भारी उछाल देखा गया है। ज्वेलरी और कीमती धातुएं वाली पर्सनल इफेक्ट्स कैटेगरी की महंगाई दर में रिकॉर्ड 56.35% की तेजी आई है। यह महंगाी के पूरे बास्केट में सबसे तेजी से बढ़ने वाला कंपोनेंट बन गया है।
आने वाले दिनों में महंगाई का आउटलुक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मौसम के जोखिमों के कारण काफी अनिश्चित हो गया है। अगर देश में मानसून कमजोर रहता है या अल नीनो का गंभीर असर दिखता है, तो खाद्य पदार्थों की कीमतें और ज्यादा बढ़ सकती हैं। दूसरी तरफ, वैश्विक स्तर पर महंगे तेल का बोझ अगर घरेलू ईंधन की कीमतों पर डाला जाता है, तो खुदरा महंगाई दर 5% के पार भी जा सकती है।
फूड इनफ्लेशन बढ़कर 4.78 फीसदी पहुंच जाने का मतलब है कि जल्द खराब होने वाली चीजों की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। खासकर टमाटर, अदरक और दूसरी सब्जियों पर यह बात लागू होती है। कोर इनफ्लेशन करीब 3.7 फीसदी पर बना रहा। इससे यह संकेत मिलता है कि रिटेल इनफ्लेशन में उछाल में फूड इनफ्लेशन का बड़ा हाथ है।
क्रूड की कीमतों में उछाल और अल-नीनो के संभावित असर से रिटेल इनफ्लेशन के लिए रिस्क बढ़ा है। अगर मानसून में बारिश कम होती है तो इसका असर खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर पड़ेगा। इधर, क्रूड में उछाल से देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें कई बार बढ़ चुकी हैं। आनंदराठी ग्रुप के चीफ इकोनॉमिस्ट सुजान हाजरा ने कहा कि अगले छह महीनों में रिटेल इनफ्लेशन 6 फीसदी के पार जा सकता है।

