टीसीएस के मार्केट कैप में इस साल अब तक 4 लाख करोड़ रुपये का नुकसान
मुंबई- यह साल टाटा समूह की कई कंपनियों के लिए अच्छा नहीं रहा। सबसे बड़ा झटका TCS से आया है, जिसने अकेले जितनी मार्केट वैल्यू गंवाई है, वह पूरे टाटा ग्रुप की कुल वैल्यू में आई गिरावट से भी ज्यादा है।
साल 2026 की शुरुआत में टाटा ग्रुप का कुल मार्केट कैप करीब 27.7 लाख करोड़ रुपये था। अब यह घटकर 24 लाख करोड़ रुपये के आसपास रह गया है। यानी ग्रुप की कुल वैल्यू में करीब 3.6 लाख करोड़ रुपये की कमी आई है।
TCS का मार्केट कैप साल की शुरुआत में 11.6 लाख करोड़ रुपये था। अब यह 8 लाख करोड़ रुपये से भी नीचे आ चुका है। यानी कंपनी ने अकेले करीब 4 लाख करोड़ रुपये की मार्केट वैल्यू गंवा दी है। हालांकि इतनी बड़ी गिरावट के बाद भी TCS अभी टाटा ग्रुप की सबसे बड़ी कंपनी बनी हुई है।
इस साल ट्रेंट के शेयरों में आई कमजोरी का असर उसकी रैंकिंग पर भी पड़ा है। कंपनी अब चौथे नंबर पर पहुंच गई है। दूसरी तरफ टाइटन और टाटा स्टील ने अच्छा प्रदर्शन किया है। इसी वजह से ये दोनों कंपनियां क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर पहुंच गई हैं।
हाल के महीनों में शेयर में आई रिकवरी के बाद टाटा मोटर्स का पैसेंजर व्हीकल बिजनेस भी टॉप-5 कंपनियों में जगह बनाने में सफल रहा है। TCS के अलावा भी टाटा ग्रुप की कई कंपनियों का प्रदर्शन कमजोर रहा है। टाटा मोटर्स के कमर्शियल व्हीकल कारोबार की मार्केट वैल्यू में करीब 20,000 करोड़ रुपये की कमी आई है। ट्रेंट ने 4,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की वैल्यू गंवाई है।
इसके अलावा टाटा कंज्यूमर के मार्केट कैप में करीब 8,000 करोड़ रुपये और टाटा एलक्सी में करीब 6,000 करोड़ रुपये की गिरावट आई है। कमजोरी के बीच कुछ कंपनियों ने शानदार प्रदर्शन भी किया है। टाटा स्टील इस साल ग्रुप की सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों में शामिल रही है। कंपनी की मार्केट वैल्यू में करीब 30,000 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है। टाइटन ने भी करीब 14,000 करोड़ रुपये की वैल्यू जोड़ी है। वहीं टाटा पावर की मार्केट वैल्यू करीब 9,000 करोड़ रुपये बढ़ी है।
2026 सिर्फ TCS के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे IT सेक्टर के लिए मुश्किल साल रहा है। फिलहाल TCS का शेयर जून 2020 के बाद के सबसे निचले स्तरों के आसपास कारोबार कर रहा है। इस साल के पहले छह महीनों में से पांच महीनों में शेयर गिरावट के साथ बंद हुआ है। कैलेंडर ईयर में TCS के शेयर में 30% से ज्यादा की गिरावट आखिरी बार 2008 में आई थी। उस साल शेयर करीब 55% टूट गया था।

