बीमा उद्योग फिर निराश, नहीं मिली छूट, कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट
नई दिल्ली। बजट से भले ही मध्यम वर्ग खुश हों, लेकिन बीमा कंपनियों के लिए बजट शुभ नहीं रहा है। नई टैक्स व्यवस्था को आकर्षक बनाने की कोशिश और बीमा पॉलिसी प्रीमियम पर टैक्स छूट के संबंध में की गई बजट घोषणाओं के बाद बीमा उद्योग ने निराशा जाहिर की है।
बीमा सेक्टर पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का कहना है कि नई टैक्स व्यवस्था को बढ़ावा देने का सरकार का फैसला बीमा कंपनियों के कारोबार को हतोत्साहित करने वाला होगा। कई करदाता बीमा पॉलिसी को सिर्फ सेक्शन 80सी के तहत मिलने वाली छूट का लाभ लेने के लिए ही खरीदते हैं। नई टैक्स व्यवस्था के ज्यादा फायदेमंद होने पर ज्यादा करदाता इसे चुनेंगे तो बीमा पॉलिसी की बिक्री पर असर होगा।
बजट में वित्त मंत्री ने ऊंची वैल्यू वाली बीमा पॉलिसी से होने वाली आय पर मिलने वाली इनकम टैक्स छूट को सीमित किया है। बजट में कहा गया कि एक अप्रैल, 2023 को या उसके बाद जारी जीवन बीमा पॉलिसी (यूलिप को छोड़कर) जिनका कुल प्रीमियम 5 लाख रुपये से ज्यादा है, ऐसी पॉलिसीज से होने वाली आय पर ही छूट दी जाएगी। 5 लाख से कम प्रीमियम वाली पॉलिसी पर छूट नहीं मिलेगी। बजट में कहा गया कि इससे उस धनराशि पर मिलने वाली टैक्स छूट प्रभावित नहीं होगी जो बीमित व्यक्ति की मृत्यु पर मिलता है। साथ ही इससे वे इंश्योरेंस पॉलिसी भी प्रभावित नहीं होंगी, जो 31 मार्च 2023 से पहले जारी हुई हैं यानी इन पर टैक्स छूट का लाभ मिलता रहेगा।
बजट पेश होने के बाद ही बीमा कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिलने लगी। एलआईसी के शेयरों में तगड़ी गिरावट देखी गई। एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ और एचडीएफस लाइफ इंश्योरेंस का शेयर के साथ जनरल इंश्योरेंस के भी शेयरों में दहाई तक की गिरावट देखी गई।

