पश्चिम बंगाल में बीजेपी 210 के पार, इसके लिए संघ ने बनाई थी यह रणनीति

मुंबई- पश्चिम बंगाल में बीजेपी भारी बहुमत के साथ पहली बार सरकार बनाने में सफल रही है। इसके साथ ही राज्य में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के 15 सालों के शासन का अंत हो जाएगा। पश्चिम बंगाल में BJP की जीत में संघ की बड़ी भूमिका बताई जा रही है। संघ ने जमीनी स्तर पर बीजेपी की जीत के लिए काम किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने बंगाल में जमकर चुनाव प्रचार किए। लेकिन, संघ के स्वयं सेवकों ने जमीनी स्तर पर पार्टी के लिए माहौल तैयार किया।

बीजेपी के लिए अब तक पश्चिम बंगाल एक अभेद्य किले की तरह था। पार्टी की लाख कोशिशों के बावजूद मुख्यमंत्री ममता 15 साल से सत्ता में बनी हुई थीं। उनकी हार ने कई लोगों को हैरान किया है। वह लंबे समय से बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई थी। बंगाल में जीत से बीजेपी को कई तरह से फायदा होगा।

संघ (RSS) औपचारिक रूप से चुनावी राजनीति से खुद को दूर रखता है। हालांकि, यह बीजेपी के लिए विचारधारा के लिहाज से बहुत अहम संगठन है। लेकिन, यह खुलकर चुनावों में हिस्सा नहीं लेता है। लेकिन, इसकी लोकल इकाई (शाखा), संबंधित संस्थाएं और स्वयं सेवकों की बड़़ी फौज चुनावों के दौरान बीजेपी के लिए काफी अहम हो जाती हैं।

संघ ने बीते दशक में पश्चिम बंगाल में अपनी पैठ बढ़ाई है। आज राज्य में इसकी हजारों शाखाएं चलती हैं। आम लोगों तक पहुंच के लिए इसके कई प्लेटफॉर्म्स ऑपरेशनल हैं। इससे ग्रामीण, जनजातीय और सीमाई इलाकों तक में आम लोगों के बीच पैठ बनाना आसान हुआ है। बताया जाता है कि संघ के स्वयं सेवकों और इससे जुड़ी संस्थाओं ने घरों, मंदिरों और चाय की दुकानों पर छोटी-छोटी बैठकें की। इसका मकसद आम लोगों का भरोसा हासिल करना था।

स्वंय सेवकों ने फोन कॉल, व्हाट्सएप ग्रुप और लोकल नेटवर्क्स के जरिए हर मतदाता तक पहुंचने की कोशिश की। इतना ही नहीं वोटर्स को नोटा का इस्तेमाल नहीं करने के लिए मनाया गया। इससे बड़ी संख्या में वोटर्स को बूथ तक ले जाने में मदद मिली।

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