अमेरिका के एच-1 वीजा के रद्द होने से आईटी कंपनियों पर 1,200 करोड़ रुपए की लागत आएगी

मुंबई– रेटिंग एजेंसी ने क्रिसिल ने सोमवार को कहा कि अमेरिका द्वारा एच1-बी वीजा के निलंबन से घरेलू आईटी फर्म पर 1200 करोड़ रुपए की लागत आएगी। इस कदम से कंपनियों के मुनाफे पर मामूली 0.25 से 0.30 प्रतिशत का असर पड़ेगा।

क्रिसिल रेटिंग्स ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में स्थानीय हायरिंग में वृद्धि के बाद से अमेरिका वीजा जारी करने पर अंकुश लगाने की सोच रहा है। इससे भारतीय आईटी कंपनियों पर पड़ने वाले प्रभाव को सीमित करने में मदद मिलेगी। अमेरिका भारतीय आईटी फर्म के लिए सबसे बड़ा बाजार है। पिछले महीने भारतीय टेक प्रोफेशनल द्वारा अमेरिका से बाहर काम करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले वीजा को डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने निलंबित कर दिया था। इस कदम को वहां बढ़ती बेरोजगारी को रोकने के लिए देखा गया था।

क्रिसिल ने हालांकि कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण आईटी फर्म के मुनाफे में 2.50 प्रतिशत की गिरावट के साथ मार्जिनल प्रभाव ज्यादा होगा। साथ ही यह भी कहा कि 15 टॉप फर्म के प्रदर्शन के विश्लेषण के अनुसार वित्त वर्ष 21 में परिचालन लाभप्रदता (operating profitability) 23 प्रतिशत पर देखी जा रही है।

एच1-बी और एल1 वीजा पर अमेरिका के इस कदम का सीमित प्रभाव पड़ेगा क्योंकि स्थानीय स्तर पर काम पर रखकर प्रवेश प्रणाली पर निर्भरता कम होगी। इसमें यह भी कहा गया है कि वीजा के रिन्यूअल प्रभावित नहीं होंगे। वित्त वर्ष 2016 की अपेक्षा  वित्त वर्ष 2020 में डिनायल दर 6 प्रतिशत बढ़कर 39 प्रतिशत तक हो जाने से स्थानीय आईटी कंपनियों द्वारा वीजा पर निर्भरता कम हो गई थी।

क्रिसिल के वरिष्ठ डायरेक्टर अनुज सेठी ने कहा कि नए एच1-बी वीजा का टॉप 5 लिस्टेड भारतीय आईटी फर्म के अमेरिकी ऑनशोर वर्कफोर्स का 5 प्रतिशत से भी कम योगदान होता है। यह पूरी आईटी इंडस्ट्री रेवेन्यु का 60 प्रतिशत है। इसके वरिष्ठ निदेशक अनुज सेठी ने कहा, दूसरी ओर, उनके अमेरिकी ऑनशोर वर्कफोर्स मिक्स में लोकल हायरिंग की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2017 में 30 से 35 प्रतिशत से बढ़कर साल 2020 में लगभग 55-60 प्रतिशत हो गई है।

उन्होंने कहा कि आईटी फर्म ने स्थानीय प्रतिभाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। विशेष रूप से डिजिटल टैलेंट के साथ। क्योंकि इनके लिए ट्रांजीशन इम्पैक्ट कम होने की उम्मीद है। अमेरिका ने मेरिट पर आधारित कार्यक्रम या कम सैलरी में संभावित वृद्धि के लिए मौजूदा एच1-बी वीजा जारी करने के ट्रांजीशन का प्रस्ताव किया है।

इसमें यह भी कहा गया है कि नए वीजा अप्रूवल (वित्त वर्ष19 में 6137 यूनिट्स) पूरी तरह से स्थानीय भर्ती के माध्यम से पूरी की जाती है। एच1-बी रुट के जरिए स्थानीय हायरिंग के लिए 25 प्रतिशत प्रीमियम पर विचार करते हुए आईटी फर्मों पर अतिरिक्त लागत का बोझ 1200 करोड़ रुपए से अधिक नहीं हो सकता है।

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