विदेशी निवेशकों ने दो साल में भारतीय शेयर बाजार से निकाले 56 अरब डॉलर
मुंबई- भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। इसके बावजूद विदेशी संस्थागत निवेशक यानी FIIs भारतीय शेयरों से पैसा निकाल रहे हैं। सितंबर 2024 तक के 24 महीनों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 38.6 अरब डॉलर लगाए थे। लेकिन इसके बाद के 24 महीनों में करीब 56.3 अरब डॉलर निकाल लिए।
ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन का मानना है कि भारतीय बाजारों में विदेशी निवेशकों की वापसी हो सकती है। लेकिन उनक वापसी लंबी अवधि के निवेश के बजाय कुछ समय के लिए कारोबार करने तक सीमित रह सकती है। भारत की रियल GDP ग्रोथ कई तिमाहियों में करीब 8 फीसदी रहने के बावजूद विदेशी निवेशकों की ओर से भारी निवेश नहीं लौटे।
रिपोर्ट के मुताबिक अब केवल मजबूत GDP ग्रोथ विदेशी निवेशकों को आकर्षित नहीं कर पा रहे। दरअसल, भारत में ब्याज दरें अमेरिका से ज्यादा होने पर विदेशी पैसा भारतीय बाजार की ओर आता था। लेकिन बीते कुछ सालों में ब्याज दरों और विदेशी निवेश के बीच का रिश्ता कमजोर हुआ है।
विदेशी निवेशक भारत में रुपये में निवेश करते हैं, लेकिन अपना रिटर्न डॉलर में देखते हैं। यानी अगर शेयर का भाव बढ़ता है, लेकिन इसी दौरान रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हो जाता है तो विदेशी निवेशक का रियल रिटर्न घट सकता है।
पिछले 10 सालों में निफ्टी ने डॉलर के हिसाब से करीब 6 फीसदी सालाना रिटर्न दिया है। वहीं, बीत दो सालों में डॉलर के हिसाब से निफ्टी का सालाना प्रदर्शन करीब 11 फीसदी निगेटिव रहा है। ऐसे में भारत की दमदार आर्थिक ग्रोथ के बावजूद विदेशी निवेशकों को बाजार से आकर्षक रिटर्न नहीं मिला।
बर्नस्टीन के मुताबिक भारत का हाई वैल्यूएशन भी विदेशी निवेश की राह में बड़ी बाधा है। भारतीय बाजार लंबे समय से दूसरे इमर्जिंग मार्केट के मुकाबले प्रीमियम पर ट्रेड करता रहा है। दिसंबर 2023 से सितंबर 2026 के दौरान भारत का औसत वैल्यूएशन दूसरे इमर्जिंग मार्केट के मुकाबले करीब 162 फीसदी रहा। इस दौरानविदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से करीब 44 अरब डॉलर निकाले।

