10 हफ्ते की बाजार में सबसे बड़ी गिरावट, एक माह में निफ्टी 1200 अंक टूटा
मुंबई- कच्चे तेलों की कीमतों में लगातार तेजी का असर बाजार पर दिखा है। भारतीय शेयर बाजारों में 24 सितंबर को 10 हफ्तों की सबसे बड़ी गिरावट आई। ब्रेंट क्रूड का प्राइस गुरुवार को उछलकर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार हो गया है। इससे दुनियाभर में महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ गया है।
निफ्टी 1.64 फीसदी यानी 383 अंक गिरकर 23,063 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 1.67 फीसदी यानी 1,247 अंक लुढ़कर 73,580 अंक पर क्लोज हुआ। दोनों ही सूचकांकों में 8 जुलाई के बाद एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट आई। ब्रेंट क्रूड 2.4 फीसदी चढ़कर 105 डॉलर के पार जाने की वजह ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान का संयुक्त राष्ट्र की आम सभा में दिया गया भाषण है। 23 सितंबर को उन्होंने कहा कि ईरान अमेरिकी दबाव के आगे कभी नहीं झुकेगा।
ईरान के राष्ट्रपति के भाषण से यह साफ हो गया है कि मध्यपूर्व का संकट जल्द खत्म होने नहीं जा रहा है। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की कोशिशें जारी हैं। अगर मध्यपूर्व की यह क्राइसिस जल्द खत्म नहीं होती है तो क्रूड ऑयल की कीमत लंबे समय तक हाई बनी रह सकती है।
एक्सिस डायरेक्ट में सीनियर रिसर्च एनालिस्ट हेमंग गोर ने कहा, “भारत के लिए क्रूड की कीमतें काफी अहम हैं। कुछ समय तक 100 डॉलर से नीचे जाने के बाद फिर से क्रूड में उछाल दिख रहा है। इससे क्रूड की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है, जिसका असर बाजार की रिकवरी पर पड़ा है।
गुरुवार का दिन पिछले ढाई महीनों में मार्केट के लिए सबसे खराब दिनों में से एक था। मार्केट पर लगातार दबाव बना हुआ है। पिछले एक महीने में निफ्टी लगभग 1200 अंक गिर चुका है। यह एक महीने में 5% की गिरावट है और पिछले एक साल में इसमें लगभग 10% की कमी आई है।
US बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से हालात और खराब हो रहे हैं। 10-साल के US ट्रेजरी यील्ड 2007 के बाद से अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं। US ट्रेजरी को सबसे सुरक्षित ग्लोबल एसेट माना जाता है। जब यील्ड बढ़ती है, तो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारत जैसे ज़्यादा जोखिम वाले उभरते बाजारों से अपना पैसा निकालकर US बॉन्ड में लगाते हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, डॉलर के मजबूत होने और FII की निकासी के कारण रुपया भी कमजोर होकर 95.83 पर आ गया है। एक लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर के तौर पर, आपके पास इंतजार करने और देखने, ग्लोबल मार्केट और सोने में निवेश को फैलाने (डाइवर्सिफाई करने) और भरोसा बनाए रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

