देश में बढ़ रही गेमर की संख्या, कुल 60 करोड़ हुए गेमर, 15 फीसदी की दर से वृद्धि
मुंबई- ‘मिक्सी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, गेमर अब कैजुअल, फ्री गेम्स छोड़कर शूटर, स्ट्रैटजी जैसे प्रतिस्पर्धी गेम्स खेल रहे हैं। इससे इन-एप खरीदारी तेजी से बढ़ रही है। रियल मनी गेमिंग यानी सट्टा आधारित गेम्स पर सख्ती के बाद गेमर का रुख गैर-सट्टा गेमिंग की तरफ मुड़ गया है।
नॉन-आरएमजी गेमिंग बाजार 2025 में 10,527 करोड़ का रहा, जो इस साल 14,350 करोड़ और 2029 तक 23,000 करोड़ तक पहुंच सकता है। देश में 60 करोड़ सक्रिय गेमर हैं। 2025 में देश में 795 करोड़ मोबाइल गेम डाउनलोड हुए, जो पूरे एशिया में सबसे ज्यादा है। गेमर भी सालभर में 9% बढ़कर 60 करोड़ हो गए।
भारत मुनाफे के लिहाज से पीछे है। बीते साल इन-एप खरीदारी से 7,656 करोड़ कमाई हुई। इस मामले में हम एशिया में छठे स्थान पर रहे। दाम को लेकर संवेदनशीलता इसकी वजह बताई गई है। भारतीय गेमर ज्यादातर मुफ्त गेम्स पसंद करते हैं। विज्ञापन कमाई का बड़ा जरिया है। 2025 में इन-गेम विज्ञापन से कंपनियों को 2,871 करोड़ की कमाई हुई।
पिछले पांच साल में मोबाइल गेमिंग आय सालाना 17 फीसदी से भी ज्यादा दर से बढ़ी है, जबकि इसी दौरान इन-एप खरीद से कमाई दोगुनी से ज्यादा हो गई। यानी गेमर अब धीरे-धीरे खर्च करना शुरू तो कर रहे हैं। 2026 तक देश का गेमिंग बाजार 48,000 करोड़ का होगा। 2031 तक इसके 94,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
बड़ी कंपनियों में गरेना/फ्री फायर, कृष्णा गेम्स/बीजीएमआई-क्राफ्टन, नजारा टेक्नोलॉजीज, ड्रीम11, गेम्सक्राफ्ट आदि हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय गेमिंग अब भी कम कमाई वाला बाजार बना हुआ है। लेकिन बेहतर लोकलाइजेशन, भारत-केंद्रित टूर्नामेंट और बदलते उपभोक्ता व्यवहार से आगामी वर्षों में खर्च बढ़ने की उम्मीद है। लूडो किंग और क्रिकेट लीग जैसे स्थानीय गेम्स सांस्कृतिक जुड़ाव के दम पर कई ग्लोबल गेम्स को डाउनलोड में पीछे छोड़ रहे हैं।

