सरकारी बैंक बाजार से तेजी से पैसे जुटाएं और लिक्विडिटी का लाभ उठाएं
मुंबई-सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSB) से कहा है कि वे बाजारों से तेजी से पैसे जुटाएं। ज्यादा से ज्यादा लिक्विडिटी का लाभ उठाएं। आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में मदद करने के लिए लगातार लोन देना सुनिश्चित करें। क्योंकि अब लॉकडाउन की सभी बंदिशें हटा ली गई हैं।
इसके साथ ही रिज़र्व बैंक (RBI) तीसरी तिमाही में अपने वित्तीय प्रदर्शन का आंकलन करने और फंड जुटाने में सफलता के बाद सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए 20 हजार करोड़ रुपए की फरवरी के अंत या मार्च की शुरूआत तक अंतिम रूप देने की योजना बना रहा है।
एक वरिष्ठ बैंकर ने कहा कि इसके पीछे यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी बैंकों के पास न सिर्फ रेगुलेटर की आवश्यकता को पूरा करने के लिए पर्याप्त पैसा हो, बल्कि उधारी देने को भी काफी बढ़ावा मिले। सरकारी बैंक ने फंड जुटाने की योजनाओं पर काम करना शुरू कर दिया है, ताकि उन्हें अधिक पैसे के लिए सरकार पर जरूरत से ज्यादा भरोसा न करना पड़े।
उन्होंने कहा कि हालांकि सभी सरकारी बैंकों को बाजारों से आक्रामक होकर पैसा जुटाने के लिए कहा गया है, लेकिन यह 12 सरकारी बैंकों में से 9 के लिए अधिक महत्वपूर्ण है। सिर्फ भारतीय स्टेट बैंक ऑफ (SBI), बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB) और केनरा बैंक इसमें मजबूत हैं। वैसे कैनरा बैंक ने इसी हफ्ते में क्यूआईपी से 2 हजार करोड़ रुपए की रकम जुटाई है। इन तीनों बैंकों में सरकार का 80% से ज्यादा हिस्सा है। अब सरकारी बैंक गैर-कोर परिसंपत्तियों (non-core assets) को भी बेचने की तेजी से योजना बना रहे हैं।
वित्त वर्ष 2020-21 के माध्यम से तीन वर्षों में 2.6 लाख करोड़ रुपए का भारी निवेश पर्याप्त होगा, सरकार ने वित्त वर्ष 2021 के बजट में सरकारी बैंकों के लिए कोई पैसा नहीं देने का निर्णय लिया था। पिछले वित्त वर्ष में सरकार ने 70,000 करोड़ रुपए बैंकों को दिया था। हालांकि, कोविड के प्रकोप और इसके परिणामस्वरूप बैंकों की बैलेंस शीट पर बढ़े दबाव ने सरकार को इस साल भी बैंकों को पैसा देने के लिए मजबूर कर दिया है।
बैंकरों ने कहा है कि छह महीने के मोरेटोरियम (repayment moratorium) अवधि के दौरान रियल्टी और बिजली जैसे महत्वपूर्ण सेक्टर्स के लिए ब्याज की छूट की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बहुत कुछ निर्भर करता है। बैंकरों को डर है कि सरकार के साथ-साथ बैंकों को इसका बोझ साझा करने के लिए दिया गया कोई भी निर्देश, उनके फाइनेंशियल सिस्टम पर दबाव बढ़ा देगा। इससे और पैसे की जरूरत बढ़ जाएगी।
पहले ही जुलाई में SBI बोर्ड ने इस वित्त वर्ष में 25,000 करोड़ रुपए जुटाने की योजना बना चुका है। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने 14,000 करोड़ रुपए की योजना बनाई है। इसमें टियर-2 कैपिटल में 4,000 करोड़ रुपए, एटी-1 बांड में 3,000 करोड़ रुपए और क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) के माध्यम से 7,000 करोड़ रुपए जुटाएगा। इसी तरह बैंक ऑफ बड़ौदा 13,500 करोड़ रुपए और केनरा बैंक 8,000 करोड़ रुपए जुटाना चाहता है।
हालांकि, बड़े बैंक तो संसाधनों को बढ़ा सकते हैं, लेकिन छोटों को सरकार की मदद की सबसे अधिक जरूरत है। रेटिंग एजेंसी इक्रा ने अनुमान लगाया है कि लोन के एकमुश्त रिस्ट्रक्चरिंग पर आरबीआई की राहत के बाद भी सरकारी बैंकों को 50 से 60 हजार करोड़ रुपए की जरूरत है। अगस्त में मूडीज ने कहा था कि सरकारी बैंकों को अगले दो साल में 2.1 लाख करोड़ रुपए की जरूरत होगी। इसमें से ज्यादातर को सरकार से पैसा मांगना पड़ सकता है।
कई एजेंसियों ने वित्त वर्ष 2021 में अर्थव्यवस्था में 11% तक की गिरावट का अनुमान लगाया है। हालांकि वित्त वर्ष 2022 में विकास में खुशहाली आने की उम्मीद है। अपनी वित्तीय स्थिरता (Financial Stability) रिपोर्ट में RBI ने भविष्यवाणी की थी कि मार्च 2021 के अंत में बुरे फंसे कर्ज (NPA) 8.5% से बढ़कर 12.5% हो सकते हैं। मार्च 2021 तक यह 20 साल में सबसे ज्यादा होगा। हालांकि, अगर आर्थिक तनाव जारी रहता है तो मार्च 2021 के बाद NPA का स्तर 14.7% तक बढ़ सकता है।

