महंगाई का झटका और तेजी से लगा, थोक महंगाई अब 10 प्रतिशत के करीब

मुंबई- देश को महंगाई के मोर्चे पर एक और बड़ा झटका लगा है। मई 2026 में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई बढ़कर 9.68 फीसदी पर पहुंच गई, जो अप्रैल में 8.26 फीसदी थी। मई में खुदरा महंगाई बढ़कर 3.93% पर पहुंच गई, जो अप्रैल में 3.48% थी। पिछले 5 महीनों में यह पहली बार है जब खुदरा महंगाई रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के टारगेट 4% के बेहद करीब पहुंच गई है।

नई WPI सीरीज (आधार वर्ष 2022-23) के तहत यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। ईंधन, कच्चे तेल, बिजली, खाद्य पदार्थों और मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने महंगाई को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।

मई में महंगाई 43 महीने में सबसे ज्यादा है। सितंबर 2022 में ये 10.70% पर पहुंच गई थी। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने आज यानी 15 जून को थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं। महंगाई बढ़ने की वजह रोजमर्रा की जरूरत के सामान और फ्यूल के दाम बढ़ना है। इसके अलावा अनाज और तेल भी महंगा हुआ है। दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच साढ़े तीन महीने से तनाव है। स्थितियां सामान्य नहीं हुईं तो महंगाई और बढ़ सकती है।

थोक महंगाई में सबसे ज्यादा उछाल ईंधन और बिजली क्षेत्र में आई. मई 2026 में फ्यूल एंड पावर की महंगाई 30.33 फीसदी रही जो अप्रैल में 24.89 फीसदी थी। पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें 49.82 फीसदी उछलीं। कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस  की महंगाई 61.51 फीसदी रही। पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण वैश्विक तेल बाजार में उथल पुथल इसकी मुख्य वजह मानी जा रही है।

WPI फूड इंडेक्स की महंगाई मई 2026 में 4.49 फीसदी रही, जो अप्रैल में 3.11 फीसदी थी। खाद्य तेल, अंडे-मांस-मछली और खाद्य उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी इसकी वजह रही। हालांकि दालें, आलू और प्याज की कीमतें साल भर पहले के मुकाबले अभी भी कम हैं।

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