विमानन कंपनियों के ईंधन 6 पर्सेंट महंगे, बढ़ सकता है किराया, यह है कारण

मुंबई- भारतीय एविएशन इंडस्ट्री एक बार फिर मुश्किल दौर से गुजर रही है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में उछाल, डॉलर के मुकाबले गिरता रुपया और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने एयरलाइंस के मुनाफे पर दबाव बढ़ा दिया है। हालांकि, ग्राउंडेड विमानों की संख्या में कमी आने से राहत मिली है, लेकिन इंटरनेशनल रूट्स पर उड़ानों के रद्द होने और रूट बदलने से एयरलाइंस का खर्च बढ़ गया है।

एयरलाइंस के लिए फ्यूल सबसे बड़ा खर्च होता है। कुल ऑपरेटिंग खर्च में इसकी हिस्सेदारी 30% से 40% तक होती है। फरवरी 2026 तक 11 महीनों में ATF की एवरेज कीमत 91,173 रुपए प्रति किलोलीटर (KL) थी, लेकिन मार्च 2026 में यह 6% बढ़कर 96,638 रुपए प्रति KL पर पहुंच गई है।

अगर कोविड से पहले (वित्त वर्ष 2020) के स्तर से तुलना करें, तो तब कीमत 64,715 रुपए प्रति KL थी। यानी अब भी कीमतें काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। मिडिल ईस्ट में तनाव और ईरान-इजराइल जंग के कारण कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है, जो एयरलाइंस के लिए बड़ा रिस्क है।

चालू वित्त वर्ष में डॉलर की तुलना में रुपया करीब 9% तक कमजोर हुआ है। बुधवार को यह डॉलर के मुकाबले गिरकर 92.05 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है। एयरलाइंस के कई बड़े खर्च डॉलर में होते हैं, जैसे…विमानों का लीज पेमेंट, इंजन-एयरक्राफ्ट का मेंटेनेंस खर्च। रुपया गिरने से इन सभी खर्चों का बोझ बढ़ गया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि घाटे में चल रही एयरलाइंस के लिए कम मार्जिन के बीच यह दोहरी मार जैसा है।

मिडिल ईस्ट में तनाव और पाकिस्तान एयरस्पेस के लगातार बंद रहने से भारतीय एयरलाइंस को अपने इंटरनेशनल रूट्स बदलने पड़ रहे हैं। एमके ग्लोबल की रिपोर्ट के मुताबिक, रूट बदलने से फ्लाइट टाइम बढ़ गया है और इससे फ्यूल की खपत भी ज्यादा हो रही है। हालांकि एयरलाइंस इस बढ़े हुए खर्च का कुछ हिस्सा पैसेंजर्स से वसूलने की कोशिश करेंगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *