बीमा ग्राहकों से वसूल रहे थे 30 पर्सेंट तक कमीशन, अब लगाम, टर्टल मिंट का शेयर 20 पर्सेंट टूटा
मुंबई। बीमा ग्राहकों से कंपनियों और एजेंटों के रूप में भारी भरकम कमीशन पर अब लगाम लगेगी। बीमा नियामक इरडाई ने एक कंसलटेंट पेपर तैयार किया है। इसमें कमीशन पर भारी कैंची चलाने की तैयारी है। इस कारण से टर्टलमिंट का शेयर 20 पर्सेंट तक टूट गया। यानी एक लाख रुपये का निवेश इस शेयर में घटकर 80,000 रुपये रह गया।
इसके साथ ही एचडीएफसी लाइफ, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ सहित अन्य कमीशन लेने वाली कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। वैसे रेगुलेटरी कारणों से जिन शेयरों में भारी गिरावट देखी जा रही है उनमें बहुत सारे शेयर हैं।
Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) ने इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन के इकोनॉमिक्स में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा। इसमें इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन के स्ट्रक्चर, खर्चों, कमीशन, मार्केट कंडक्ट और पारदर्शिता में बदलाव का प्रस्ताव दिया गया है। इससे Turtlemint के शेयर 20% गिरकर 109.04 रुपये प्रति शेयर पर बंद हुए।
बीमा नियामक इरडाई कमीशन और डिस्ट्रीब्यूशन पर कंसल्टेशन पेपर में बैंकों के कमीशन में बड़ी कटौती का सुझाव दे सकता है, जबकि इंडिविजुअल एजेंट्स के कमीशन में सबसे कम कटौती हो सकती है।
इंश्योरेंस रेगुलेटर ने कमीशन के नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत पेमेंट की सीमा तय करने, उन्हें प्रोडक्ट की जटिलता से जोड़ने और लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के कमीशन को पॉलिसी के पहले साल से आगे तक फैलाने की बात कही गई है।
नए बिज़नेस से मिलने वाले कमीशन में कमी के कारण टर्टलमिंट की कमाई पर जोखिम है। जेफ़रीज़ का कहना है कि कमीशन दरों में 10% की कटौती से टर्टलमिंट की कमाई में 10-12% की गिरावट आ सकती है। प्रस्तावित ‘टेक-रेट कैप’ (कमीशन की अधिकतम सीमा) से PB Fintech के हेल्थ और मोटर बिज़नेस के यूनिट इकोनॉमिक्स पर काफी दबाव पड़ सकता है।
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल के शेयरों में 8 फीसदी तक की गिरावट आई जबकि एचडीएफसी लाइफ के शेयरों में 6 पर्सेंट की गिरावट देखी गई। एसबीआई लाइफ का शेयर 3 पर्सेंट, आईसीआईसीआई लोंबार्ड का 2.5 पर्सेंट और एलआईसी का शेयर दो फीसदी गिरकर बंद हुआ।
इरडाई के प्रस्ताव में कहा गया है कि कमीशन के स्तर को प्रोडक्ट की जटिलता और उन्हें बेचने में लगने वाली मेहनत से जोड़ने का प्रस्ताव दिया गया है। इसमें “ओपन आर्किटेक्चर” (जैसे ब्रोकर और बैंक) के जरिए बेचे जाने वाले प्रोडक्ट्स के लिए कम कमीशन तय किया गया है। ये हेल्थ, मोटर और लाइफ़ इंश्योरेंस की बिक्री के बड़े चैनल हैं।
अनिवार्य इंश्योरेंस कवर, जैसे कि थर्ड-पार्टी मोटर पॉलिसी, पर बहुत कम या कोई कमीशन नहीं मिलेगा। लोन के साथ इंश्योरेंस बेचने वाले बैंकों और लेंडर्स के लिए कमीशन को प्रोडक्ट के आधार पर 2% से 5% के बीच सीमित करने का प्रस्ताव है।
क्रेडिट के साथ इंश्योरेंस की अनिवार्य बंडलिंग पर रोक लगाई जाएगी। हेल्थ इंश्योरेंस लेने पर डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए कमीशन को पहली बार 15% से 20% के बीच सीमित करने का प्रस्ताव है। इंश्योरेंस के रिन्यूअल और किसी दूसरी इंश्योरेंस कंपनी में पोर्टिंग पर कमीशन को 5% से 10% के निचले स्तर पर सीमित किया गया है।
रेगुलेटर ने प्रस्ताव दिया है कि पर्सनल एक्सीडेंट कवर वाले मोटर इंश्योरेंस पर कमीशन 5% से 10% के बीच सीमित होगा। लाइफ इंश्योरेंस के मामले में, पॉलिसी की अवधि के आधार पर डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए पहले साल का कमीशन 5% से 20% के बीच सीमित किया गया है।
रेगुलेटर ने प्रस्तावों को अंतिम रूप देने से पहले 25 अक्टूबर तक फीडबैक मांगा है। बाजार को चिंता है कि अगर इंश्योरेंस पॉलिसी बेचने पर मिलने वाले कमीशन की सीमा घटती है, तो टर्टलमिंट जैसी कंपनियों की कमाई प्रभावित हो सकती है। इसी आशंका के बीच इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़ी दूसरी कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव दिखा।
ये अभी प्रस्ताव हैं, लागू हो चुके नियम नहीं। टर्टलमिंट को आसान भाषा में इंश्योरेंस खरीदने और बेचने में मदद करने वाला टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म समझिए। इसकी वेबसाइट पर ग्राहक अलग-अलग कंपनियों के हेल्थ, कार, बाइक और लाइफ इंश्योरेंस प्लान देख सकते हैं। कंपनी इंश्योरेंस एडवाइजर्स को भी डिजिटल टूल देती है, जिनकी मदद से वे ग्राहक को पॉलिसी समझाने, बेचने और बाद में सेवा देने का काम करते हैं।
मान लीजिए किसी पॉलिसी का प्रीमियम ₹10,000 है. उसे बेचने वाले प्लेटफॉर्म को इस बिक्री पर एक तय भुगतान मिलता है। अब अगर नए नियम उस भुगतान की सीमा कम कर दें, तो कंपनी को हर पॉलिसी पर पहले के मुकाबले कम रकम मिल सकती है। यह सिर्फ समझाने के लिए उदाहरण है।

