इंसानी नस्ल खत्म कर देगा एआई, खतरा टालने के लिए अब बहुत कम समय
मुंबई- AI पूरी मानव जाति को खत्म कर सकती है। इसे रोकने के लिए समय बहुत कम बचा है। गूगल डीपमाइंड के एक पूर्व वैज्ञानिक बिलाल चुगताई ने यह चेतावनी दी है। उन्होंने इस्तीफा देने के बाद दुनिया को AI के इस छिपे खतरे से आगाह किया है।
इससे पहले एंथ्रोपिक के रिसर्चर जैकब कॉक्सन ने भी इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने AI के खतरे को लेकर कहा था कि AI बनाने वाले डेवलपर्स खुद मानते हैं कि 2030 तक यह तकनीक इंसानों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।
अभी तक हम मशीनों को जैसा आदेश देते हैं, वे वैसा ही काम करती हैं। लेकिन आने वाली समय में ऐसी मशीने बन जाएंगी जो इंसान के दिमाग से भी ज्यादा चालाक और समझदार होगी। इसे AGI कहते हैं। जब मशीन इंसानों से ज्यादा बुद्धिमान हो जाएगी, तो वह हमारे आदेश मानना बंद कर सकती है। ये ऐसे डिजिटल हथियार या ड्रोन होंगे जिन्हें चलाने के लिए किसी इंसान की जरूरत नहीं होगी। ये मशीनें खुद तय करेंगी कि किस पर हमला करना है या मारना है।
बिलाल चुगताई गूगल डीपमाइंड में उस टीम का हिस्सा थे, जिसका काम यह देखना था कि AI इंसानों के फायदे के लिए ही काम करे, नुकसान न पहुंचाए। उन्होंने कहा, “गूगल में काम करते हुए मैंने AI को बनते और बदलते हुए बहुत करीब से देखा है। यह तकनीक जिस रास्ते पर जा रही है, वह डरावना है। AI इंसानी नस्ल खत्म कर सकता है और इस खतरे को टालने के लिए समय बहुत कम है।”
बिलाल मानते है कि कंपनियां जल्द ही इंसानों से भी ज्यादा समझदार AI बना लेंगी। एक वक्त ऐसा आएगा जब इंसानों का इन पर से पूरा कंट्रोल खत्म हो जाएगा।
4 साल में AI साधारण से सीधे हैकिंग तक पहुंचा
AI बनाने वाली कंपनी ‘ओपनएआई’ ने दावा किया कि उनके AI सिस्टम ने गणित की 90 साल पुरानी एक बहुत मुश्किल गुत्थी (नेवियर-स्टोक्स प्रॉब्लम) सुलझा ली है। दूसरा डरावना मामला तब आया जब बिना किसी इंसान के कहे, ओपनएआई के ही करीब 700 AI एजेंट ने ‘हगिंग फेस’ नाम की कंपनी के सिस्टम को हैक करने की कोशिश की।

