एनएसई आईपीओ में लगा रहे हैं पैसा तो इन जोखिमों पर पहले दीजिए ध्यान

मुंबई- अगर आप नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई के आईपीओ में पैसा लगाने की सोच रहे हैं तो संभलकर लगाइए। इसके इतने जोखिम हैं कि आपको पैसा लगाने से पहले सलाहकारों से सलाह लेकर और इसके जोखिम को देखकर आईपीओ में निवेश करना चाहिए।

NSE के लिए सबसे बड़ा जोखिम डेरिवेटिव्स पर ज्यादा निर्भरता है। FY2026 में सिर्फ ऑप्शंस से 60.22% रेवेन्यू आया था। ऐसे में नियमों में बदलाव का असर कंपनी के कारोबार पर पड़ सकता है। एक और चिंता इक्विटी ऑप्शंस में NSE की घटती हिस्सेदारी है। FY2024 में यह 96.86% थी। Q1 FY2027 में यह घटकर 68.48% रह गई।

कंपनी का रेवेन्यू कुछ बड़े ट्रेडिंग मेंबर्स पर भी निर्भर है। Q1 FY2027 में टॉप 10 ट्रेडिंग मेंबर्स से 47% रेवेन्यू आया। अगर इनमें से बड़े सदस्य दूसरी जगह चले जाते हैं या उनकी ट्रेडिंग गतिविधि घटती है, तो NSE के कारोबार पर असर पड़ सकता है।

अपर प्राइस बैंड 1,785 रुपये पर NSE की कुल मार्केट वैल्यूएशन करीब 4.42 लाख करोड़ रुपये होगी। इस प्राइस पर शेयर FY26 की कमाई के 42.9 गुना PE रेश्यो पर मिलेगा। SBI सिक्योरिटीज के मुताबिक विदेशी शेयर बाजार कंपनियां करीब 19 से 26 गुना के PE के मुकाबले काफी ज्यादा है।

FY24 में NSE की ऑपरेशंस से रेवेन्यू 14,780 करोड़ रुपये थी, जो FY25 में बढ़कर 17,141 करोड़ रुपये हो गई। लेकिन FY26 में करीब 3.1 फीसदी घटकर 16,601 करोड़ रुपये रह गई। मुनाफा भी FY24 के 8,306 करोड़ रुपये से बढ़कर अगले साल 12,188 करोड़ रुपये हुआ था। लेकिन FY26 में यह घटकर 10,302 करोड़ रुपये रह गया।

FY26 में उसका ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन 67.6 फीसदी और नेट प्रॉफिट मार्जिन 62.1 फीसदी रहा। जबकि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में NSE ने 4,560 करोड़ रुपये की आय और 3,120 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया। इस दौरान ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन बढ़कर 77.9 फीसदी पहुंच गया।

NSE की कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा ट्रांजेक्शन चार्जेज से आता है। FY26 में कुल आय का करीब 78.7 फीसदी हिस्सेदारी ट्रांजेक्शन चार्जेज का रहा, जिसमें अकेले ऑप्शंस बिजनेस की हिस्सेदारी करीब 60.2 फीसदी थी। रिपोर्ट के मुताबिक अगर ऑप्शंस बिजनेस में कमी या इससे जुड़े नियम बदलने पर कंपनी की आय पर असर पड़ सकता है। क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम सहित बाजार के नियमों में कोई बड़ा बदलाव लेनदेन की मात्रा पर असर डाल सकता है।

इसके अलावा NSE का पूरा कारोबार तकनीक पर निर्भर है। सर्वर में खराबी, साइबर हमला या कारोबार रुकने से कंपनी को आर्थिक नुकसान होने के साथ उसकी साख पर भी असर पड़ सकता है। मई 2025 में कंपनी को सेवा बाधित करने वाला साइबर हमला भी झेलना पड़ा था, हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक FY24 से FY26 के बीच कोई ऐसा साइबर मामला नहीं हुआ जिसे कंपनी संभाल न पाई हो।

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