महाराजा एंड स्पीडेक्स में पैसा लगाने से पहले देख लीजिए इसमें कितना है रिस्क
मुंबई- महाराजा एंड स्पीडेक्स इंडिया बीएसई एसएमई पर लिस्ट होने के लिए आईपीओ ला रही है। बाजार के एक्सपर्ट कहते हैं कि इस आईपीओ में बहुत सारा जोखिम है। ऐसे में कोई पैसा लगाना चाहता है तो उसे पहले इन जोखिमों को अच्छी तरह से समझना चाहिए।
महाराजा एंड स्पीडेक्स स्टेनलेस स्टील के बोतल और ड्रिंकवेयर प्रोडक्ट की मैन्युफैक्चरिंग और वितरण करती है। कंपनी 80 करोड़ रुपये आईपीओ से जुटाना चाहती है। 43.08 लाख इक्विटी शेयरों को यह 177 से 186 रुपये के भाव पर जारी करेगी। यह आईपीओ गुरुवार यानी 10 सितंबर को खुलेगा।
नए इश्यू से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल कर्ज का कुछ हिस्सा चुकाने, मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में प्लांट और मशीनरी खरीदने और सामान्य कॉर्पोरेट कामों के लिए किया जाएगा। महाराजा एंड स्पीडेक्स इंडिया के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर राकेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि कंपनी ने स्पीडेक्स और ड्यूड्रॉप ब्रांड्स के साथ-साथ OEM और प्राइवेट-लेबल क्षमताओं के दम पर स्टेनलेस-स्टील की बोतलों और उससे जुड़े ड्रिंकवेयर प्रोडक्ट्स का एक विविध पोर्टफोलियो तैयार किया है।
विश्लेषकों के मुताबिक कंपनी का फाइनेंशियल रिजल्ट चौंकाने वाला है। 31 मार्च 2024 को इसका फायदा केवल एक करोड़ रुपये था। लेकिन दो ही साल में यानी 31 मार्च 2026 को यह बढ़कर 15 करोड़ रुपये हो गया। यानी दो साल में 15 कंपनी का फायदा 15 गुना बढ़ गया। यह एक चौंकाने वाला आंकड़ा है जिस पर सबको नजर रखनी होगी।
हालांकि इस दौरान कंपनी की कुल आय केवल दो गुना ही बढ़ी है। कुल उधारी 16 करोड़ से बढ़कर 26 करोड़ रुपये के पार हो गई है। इसी तरह अन्य जोखिम में कंपनी अपने मुख्य स्टेनलेस-स्टील रॉ मटीरियल के लिए बहुत कम सप्लायर्स पर निर्भर है। कुल रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा कुछ खास कस्टमर्स के ग्रुप से आता है।
चैनल से जुड़े टकराव: OEM (ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर) और प्राइवेट-लेबल व्यवस्थाओं के ज़रिए दूसरों के लिए प्रोडक्ट बनाने से कंपनी के अपने ब्रांडेड आइटम के साथ बिज़नेस में टकराव हो सकता है। रेवेन्यू मुख्य रूप से कुछ खास इलाकों और राज्यों से आता है, जिससे लोकल स्तर पर होने वाली रुकावटों से कामकाज पर असर पड़ सकता है।
किराये की जगह: मुख्य मैन्युफैक्चरिंग प्लांट किराये की जगहों पर चलते हैं, जो समय पर लीज़ रिन्यूअल पर निर्भर करते हैं। ग्रे मार्केट में उतार-चढ़ाव: अनऑफिशियल ग्रे मार्केट प्रीमियम डेटा तेज़ी से बदलता है और सिर्फ़ उन ट्रेंड्स के आधार पर निवेश करने में सट्टेबाज़ी का ज़्यादा रिस्क होता है।

