एसआईपी निवेशक लार्ज कैप में लगा रहे पैसे, रिटर्न मिड और स्मॉलकैप से आ रहा
मुंबई- मिडकैप और स्मॉलकैप फंड्स ने इस साल लार्ज कैप फंड्स के मुकाबले बेहतर रिटर्न दिए हैं, लेकिन एसआईपी (SIP) निवेशकों की पहली पसंद अब भी लार्ज कैप फंड्स ही बने हुए हैं। जून 2026 में एसआईपी निवेश के दम पर सबसे ज्यादा पैसा लार्ज कैप फंड्स में आया। वहीं, जो निवेशक खुद फंड चुनकर निवेश कर रहे हैं, उनका रुझान धीरे-धीरे मिडकैप और स्मॉलकैप फंड्स की ओर बढ़ रहा है।
लार्ज कैप फंड्स में निवेशकों का भरोसा बना रहा। इक्विटी फंड्स की सभी कैटेगरी में साल की शुरुआत से अब तक सबसे कम रिटर्न (-5.4%) देने के बावजूद, जून में लार्ज-कैप स्कीम में सबसे ज्यादा 9,656 करोड़ रुपये का निवेश आया। इस ट्रेंड की मुख्य वजह SIP निवेश और पैसिव एलोकेशन है।
निवेशकों की पसंद विवेकाधीन (डिस्क्रेशनरी) निवेश में बदलती दिखी। जून में मिडकैप फंड्स में निवेश सबसे ज्यादा बढ़ा और इनमें पिछले महीने के मुकाबले 1,336 करोड़ रुपये ज्यादा आए। दूसरी ओर, स्मॉलकैप फंड्स में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। जून के दौरान इनमें 4,508 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया। साथ ही, इस कैटेगरी ने इस साल अब तक (YTD) 9.3 फीसदी का सबसे बेहतर रिटर्न भी दिया।
लार्ज-कैप फंड में ऑटोमैटिक SIP के जरिए पैसा लगातार आ रहा है। एक्टिव तौर पर निवेश का फैसला लेने वाले निवेशक मिड-कैप और स्मॉल-कैप के मौकों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। सेक्टोरल फंड्स में हेल्थकेयर 2026 का सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा। इसने साल की शुरुआत से अब तक (YTD) करीब 15 फीसदी का रिटर्न दिया। जून के दौरान इस सेक्टर में 294 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश भी आया। निवेशकों ने अस्पताल, डायग्नोस्टिक्स और फार्मा कंपनियों जैसे अपेक्षाकृत स्थिर कैश फ्लो वाले कारोबारों को प्राथमिकता दी।
बैंकिंग सेक्टर में भी निवेशकों का रुख चुनिंदा रहा। जून के दौरान प्राइवेट बैंकिंग फंड्स में 802 करोड़ रुपये का नया निवेश आया, जबकि व्यापक बैंकिंग इंडेक्स से निवेश निकला। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक पूरे बैंकिंग सेक्टर के बजाय चुनिंदा निजी बैंकों पर ज्यादा भरोसा जता रहे हैं।
कुल नेट एसेट-लेवल इनफ्लो मई के 56,886 करोड़ रुपये से 14 फीसदी घटकर जून में 48,826 करोड़ रुपये रह गया। हालांकि, इक्विटी फंड निवेशकों की पहली पसंद बने रहे। जून में इक्विटी फंड्स में शुद्ध निवेश बढ़कर 48,914 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो मई के मुकाबले 3,215 करोड़ रुपये ज्यादा है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई, जब इस कैटेगरी ने जून के दौरान केवल 1.8 फीसदी का रिटर्न दिया।

