विप्रो के शेयरों में भारी गिरावट, 6 साल के निचले स्तर पर पहुंचा शेयर का भाव
मुंबई- विप्रो का शेयर लगातार पांचवें कारोबारी दिन गिरावट में रहा है। पिछले एक हफ्ते में इसमें करीब 14 फीसदी की गिरावट आई है। शेयरों में गिरावट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2026 में अब तक यह करीब 33 फीसदी टूट चुका है। इसके मुकाबले सेंसेक्स में 12 फीसदी की गिरावट आई है।
विप्रो का 15,000 करोड़ रुपये का शेयर बायबैक 11 जून से शुरू हो गया है। यह 17 जून तक खुला रहेगा। कंपनी ने 2 रुपये फेस वैल्यू वाले 60 करोड़ तक शेयर वापस खरीदने की योजना बनाई है। यह कंपनी की कुल चुकता शेयर पूंजी का करीब 5.72 फीसदी है। कंपनी ने बायबैक के लिए 250 रुपये प्रति शेयर का भाव तय किया है, जो मौजूदा बाजार भाव से काफी ज्यादा है।
कंपनी का कहना है कि उसके पास जरूरत से ज्यादा नकदी है। ऐसे में वह अपने शेयरधारकों को यह पैसा लौटाना चाहती है। बायबैक के जरिए कंपनी के कुल शेयरों की संख्या कम होगी, जिससे प्रति शेयर कमाई (EPS) और रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) जैसे वित्तीय अनुपात बेहतर हो सकते हैं। कंपनी ने बायबैक का 15 फीसदी हिस्सा छोटे निवेशकों के लिए भी आरक्षित रखा है।
मिराए एसेट शेयरखान का मानना है कि निकट भविष्य में विप्रो के कारोबार पर दबाव बना रह सकता है। ब्रोकरेज के मुताबिक, अप्रैल-जून 2026 तिमाही के लिए कंपनी ने कमजोर आय वृद्धि का अनुमान दिया है। इसके पीछे बड़े सौदों के लागू होने में देरी, एक बड़े ग्राहक से जुड़ी समस्या और हेल्थकेयर व मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सुस्ती जैसी वजहें हैं।
ब्रोकरेज का कहना है कि ग्राहक से जुड़ी समस्या पहली तिमाही के बाद कम हो सकती है, लेकिन बड़े सौदों से आय आने में देरी का जोखिम अभी भी बना हुआ है। शेयरखान के अनुसार, मौजूदा वैल्यूएशन को देखते हुए फिलहाल शेयर में जोखिम और रिटर्न का संतुलन बना हुआ है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में विप्रो की आय वृद्धि सीमित रह सकती है। ब्रोकरेज का कहना है कि पहली तिमाही की शुरुआत कमजोर रहने की संभावना है और बड़े सौदों के लागू होने में देरी, शीर्ष ग्राहकों से कारोबार में कमी तथा कुछ सेक्टरों में कमजोरी का असर बना रह सकता है।

