टाटा संस की लिस्टिंग फिर लटकी, नोएल टाटा ने आरबीआई को लिखी चिट्‌ठी

मुंबई- टाटा संस की लिस्टिंग फिर लटकने वाली है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को पत्र लिखकर Tata Sons की संभावित लिस्टिंग का विरोध किया है। उनका कहना है कि अगर Tata Sons शेयर बाजार में लिस्ट होती है, तो इससे कंपनी का मूल चरित्र बदल सकता है। इसका असर टाटा ट्रस्ट्स के सामाजिक और परोपकारी उद्देश्यों पर असर पड़ सकता है।

8 जून को Tata Trusts और 12 जून को Tata Sons बोर्ड की महत्वपूर्ण बैठकें होने वाली हैं। इन बैठकों में कई प्रशासनिक और नेतृत्व से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। नोएल टाटा ने RBI और सरकार के अन्य संबंधित पक्षों को बताया है कि Tata Sons हमेशा से लंबी अवधि के नजरिए के साथ काम करती रही है। कंपनी का फोकस सिर्फ मुनाफा कमाने पर नहीं, बल्कि नए कारोबार खड़े करने और रणनीतिक क्षेत्रों में निवेश करने पर भी रहा है।

टाटा ट्रस्ट्स का मानना है कि अगर कंपनी शेयर बाजार में लिस्ट हो जाती है, तो उस पर हर तिमाही बेहतर नतीजे दिखाने और सार्वजनिक निवेशकों की अपेक्षाएं पूरी करने का दबाव बढ़ जाएगा। इससे कंपनी की लॉन्ग टर्म नजरिया प्रभावित हो सकता है। ट्रस्ट्स ने यह भी तर्क दिया है कि सार्वजनिक शेयरधारक आमतौर पर ज्यादा मुनाफे और तेज रिटर्न की उम्मीद करते हैं।

ऐसे में Tata Sons जैसी होल्डिंग कंपनी के लिए लंबी अवधि की रणनीति पर टिके रहना मुश्किल हो सकता है। टाटा ट्रस्ट्स का कहना है कि लिस्टिंग के बाद शेयरधारक शॉर्ट टर्म रिटर्न को प्राथमिकता दे सकते हैं। इससे ऐसे लॉन्ग टर्म इनवेस्टमेंट प्रभावित हो सकते हैं।

टाटा ट्रस्ट्स से जुड़े लोगों का कहना है कि एयर इंडिया और सेमीकंडक्टर जैसे कारोबारों में शुरुआती वर्षों में भारी निवेश और नुकसान हो सकता है। उनका मानना है कि मौजूदा स्ट्रक्चर Tata Sons को ऐसे फैसले लेने की आजादी देती है। वहीं, लिस्टिंग के बाद निवेशकों का दबाव बढ़ सकता है।

Tata Sons की लिस्टिंग का मुद्दा RBI के NBFC नियमों से जुड़ा हुआ है। RBI के स्केल-बेस्ड रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत कुछ बड़े अपर-लेयर NBFCs को तय समयसीमा के भीतर लिस्ट होना होता है, जब तक उन्हें विशेष छूट न मिल जाए। Tata Sons को अपर-लेयर कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के रूप में क्लासिफाइड किया गया है। इसके बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक नोएल टाटा लिस्टिंग के स्पष्ट रूप से खिलाफ हैं। पिछले साल टाटा ट्रस्ट्स के बोर्ड ने भी Tata Sons की लिस्टिंग का विरोध करने वाला प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया था। हालांकि कुछ ट्रस्टी मानते हैं कि लिस्टिंग से कंपनी की पारदर्शिता बढ़ेगी, Tata Sons का वास्तविक बाजार मूल्य सामने आएगा और माइनोरिटी शेयरहोल्डर्स को भी फायदा मिलेगा।

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