एक्सिस फ्लैक्सीकैप फंड ने दिया झटका, पांच साल में केवल 9.65 फीसदी फायदा
मुंबई- पिछले पांच सालों से घरेलू और वैश्विक कारणों के चलते बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के बीच फ्लैक्सीकैप म्यूचुअल फंडों ने निवेशकों को बेहतर रिटर्न दिया है। इस दौरान पिछले तीन वर्षों में कुछ फंडों ने सालाना 15 फीसदी से भी ज्यादा का रिटर्न दिया है। हालांकि, इस दौरान एक्सिस म्यूचुअल फंड का फ्लैक्सीकैप फंड सबसे खराब प्रदर्शन किया है। एक्सिस की स्कीम ने पांच साल में केवल 9.65 प्रतिशत सालाना रिटर्न दिया है। ऐसे में यह सेंसेक्स और एनएसई से भी कम रिटर्न है।
इस कैटेगरी में आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल फंड की स्कीम ने पांच साल पूरे कर लिए हैं और इस दौरान 10 लाख रुपये का निवेश करीब 20 लाख रुपये हो गया है। अर्थलाभ डॉटकॉम के आंकड़ों के मुताबिक, 17 जुलाई, 2021 को शुरू हुए आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल की फ्लैक्सीकैप स्कीम में अगर किसी ने 10 लाख रुपये का एकमुश्त निवेश किया होगा तो वह रकम इस साल 30 जून तक 19.61 लाख रुपये हो गई। यानी 14.55 प्रतिशत चक्रवृद्धि (सीएजीआर) की दर से रिटर्न मिला है।
बात तीन साल की करें तो आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल की फ्लैक्सीकैप स्कीम ने 15.53 फीसदी सीएजीआर की दर से रिटर्न दिया है। फ्रैंकलिन टेंपल्टन की इसी स्कीम ने 13.34 फीसदी की दर से फायदा दिया। निप्पॉन म्यूचुअल फंड की इस स्कीम ने तीन साल में 11.81 फीसदी की दर से और कोटक म्यूचुअल फँड की स्कीम ने 12.76 फीसदी की दर से फायदा दिया है। एक्सिस की स्कीम ने 12.39 प्रतिशत सीएजीआर की दर से रिटर्न दिया है।
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल की स्कीम में शुरू होने के समय से मासिक 10,000 रुपये का एसआईपी 30 जून, 2026 तक 8.47 लाख रुपये हो गया। जबकि वास्तविक निवेश केवल 6 लाख रुपये रहा है। यानी 13.83 फीसदी सीएजीआर की दर से रिटर्न मिला है। स्कीम के बेंचमार्क में इसी तरह का निवेश करने पर 10.43% का रिटर्न मिला है।
फ्लैक्सीकप फंड मूलरूप से लार्ज-कैप, मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में निवेश करने वाली ओपन-एंडेड डायनामिक इक्विटी स्कीम होती हैं। यह स्कीम ‘ग्रोथ से वैल्यू बनती है’ के सिद्धांत पर आधारित निवेश नीति का पालन करती है। इसका मकसद ‘प्योर बॉटम-अप स्टॉक-पिकिंग अप्रोच’ के जरिए तेजी से बढ़ने की क्षमता वाले मौकों में निवेश करना है।
इस स्कीम को एक हाई-कनविक्शन पोर्टफोलियो बनाए रखने की कोशिश के साथ मैनेज किया जाता है, जिसमें एक्टिव शेयर यानी बेंचमार्क से अंतर 60% से ज़्यादा होता है और यह बेंचमार्क-एग्नोस्टिक होती है। इसका मकसद ऐसे पोर्टफोलियो को बनाना है जिसमें शामिल कंपनियां गिरावट के समय व्यापक बाजार की तुलना में तेजी से और बेहतर तरीके से रिकवर कर सकें। उदाहरण के लिए व्यापक बाज़ार में गिरावट की तुलना में स्कीम की एनएवी को रिकवर होने में कम समय लगा। पोर्टफोलियो का मार्केट-कैप मिक्स समय के साथ इसके बॉटम-अप स्टॉक सिलेक्शन प्रोसेस के स्वाभाविक नतीजे के तौर पर विकसित हुआ है।
ICICI प्रूडेंशियल एएएमसी के सीनियर फंड मैनेजर रजत चंडक कहते हैं, पिछले पांच साल का सफर फ़ायदेमंद होने के साथ चुनौतीपूर्ण भी रहा है। इस दौरान, हम अपनी मुख्य निवेश सोच पर अडिग रहे हैं। इसमें बॉटम-अप रिसर्च के जरिए अच्छे बिजनेस की पहचान करना, मजबूत मैनेजमेंट टीमों का साथ देना और लंबे समय के नजरिए से निवेश करना शामिल है।
शॉर्ट-टर्म में कैश के लेन-देन (टैक्टिकल कैश कॉल्स) पर ध्यान देने के बजाय, हमारा फोकस ऐसे बिजनेस में हिस्सेदारी रखने पर रहा है जिनमें लंबे समय तक बढ़ने की क्षमता हो और हम मार्केट के उतार-चढ़ाव के दौरान भी उनमें बने रहें। हमारा मानना है कि सोच-समझकर स्टॉक चुनना और अपने इन्वेस्टमेंट के तरीके पर अडिग रहना ही अब तक इस फंड की सफलता की मुख्य वजहें रही हैं। आगे भले ही मार्केट में अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव का दौर आता रहेगा, लेकिन हम भारतीय इक्विटी में लंबे समय के मौकों को लेकर उम्मीद बनाए हुए हैं और ऐसे बिज़नेस पर फोकस करना जारी रखेंगे जो लगातार बढ़ सकें और हमारे इन्वेस्टर्स के लिए लंबे समय में वेल्थ बना सकें।”
पोर्टफोलियो का 60-65% हिस्सा ग्रोथ-ओरिएंटेड रहा है, जबकि 30-35% हिस्सा कॉन्ट्रा/साइक्लिकल शेयरों में लगा है। ग्रोथ के लिए, यह स्कीम ऐसी कंपनियों को चुनती है जिनका काम करने का ट्रैक रिकॉर्ड शानदार हो, मैनेजमेंट प्रोफेशनल हो। भविष्य की संभावनाएं अच्छी हों और जो लगातार मार्केट-शेयर बढ़ा रही हों। कॉन्ट्रा मौकों के लिए और मार्केट की घटनाओं के दौरान यह ‘खरीदें और होल्ड करें’ (buy and hold) वाली रणनीति अपनाती है। 30 जून, 2026 तक, पोर्टफोलियो का झुकाव मुख्य रूप से कंजम्पशन-बेस्ड सेक्टर की ओर है।

