ऑनलाइन फूड और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म फिर बढ़ा सकते हैं डिलीवरी चार्ज
मुंबई- ऑनलाइन फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म (जैसे ब्लिंकिट, जेप्टो) से सामान मंगाना महंगा हो सकता है। अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण देश में पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब चार रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हुई है। इससे स्विगी और जोमैटो जैसी कंपनियों पर डिलीवरी कॉस्ट का दबाव बढ़ गया है।
2023-2026 के बीच जोमैटो, स्विगी पर प्लेटफॉर्म फीस 9 गुना हो गई। जोमैटो ने 20 मार्च को ही अपनी प्लेटफॉर्म फीस 19% यानी ₹2.40 बढ़ाकर ₹14.90 (बिना GST) कर दी थी। वहीं, स्विगी ने 24 मार्च से हर ऑर्डर पर प्लेटफॉर्म फीस में 17% की बढ़ोतरी की थी। यूजर्स हर ऑर्डर पर 14 रुपए के बजाय अब 17.58 फीसदी ज्यादा प्लेटफॉर्म फीस दे रहे हैं।
इलारा कैपिटल की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्यूल की कीमतें बढ़ने से कंपनियों के मार्जिन पर सीधा असर पड़ रहा है। इस अतिरिक्त खर्च का बोझ कंपनियां ग्राहकों पर डाल सकती हैं। इसके चलते आपके हर ऑर्डर के लिए लगने वाला डिलीवरी चार्ज या अन्य फीस बढ़ाई जा सकती है।
अभी क्विक कॉमर्स (10 मिनिट में डिलीवरी) के लिए कंपनियों का औसत डिलीवरी खर्च ₹35 से ₹50 प्रति ऑर्डर आता है। फूड डिलीवरी के लिए यह खर्च ₹55 से ₹60 प्रति ऑर्डर के बीच आता है। कुल मिलाकर कंपनियों का मिला-जुला औसत खर्च इटर्नल के लिए ₹45 और स्विगी के लिए 55 रुपये प्रति ऑर्डर है।
आमतौर पर कुल डिलीवरी कॉस्ट में फ्यूल का हिस्सा लगभग 20% होता है। इस हिसाब से प्रति ऑर्डर ईंधन की लागत ₹9 से ₹10 बैठती है। हाल ही में हुई 4% की बढ़ोतरी से कंपनियों को प्रति ऑर्डर करीब 44 पैसे का नुकसान हो रहा है। अगर कंपनियां इस बढ़े हुए खर्च का बोझ ग्राहकों पर नहीं डालती हैं और इसे खुद झेलती हैं, तो उनके मुनाफे पर तगड़ा असर पड़ेगा।

