बीमा लेने के बाद भी 95 फीसदी रकम अपने पास से खर्च कर रहे पॉलिसीधारक

मुंबई-हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम को लेकर एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। हेल्थ इंश्योरेंस या स्वास्थ्य बीमा स्कीम होने के बाद भी मरीजों को इलाज के खर्च का बड़ा हिस्सा अपनी जेब से या उधार लेकर चुकाना पड़ा। यह जानकारी राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के साल 2025 के सर्वे में सामने आई है।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की ओर से जनवरी-दिसंबर 2025 के बीच किए गए घरेलू उपभोग सर्वेक्षण (Household Consumption Survey) के अनुसार, अस्पताल में भर्ती होने के दौरान इलाज के खर्च का एक बड़ा हिस्सा आज भी परिवारों को अपनी बचत, कर्ज या संपत्ति बेचकर चुकाना पड़ रहा है। सर्वे के अनुसार, साल 2017-18 के मुकाबले स्वास्थ्य योजनाओं के कवरेज में भारी वृद्धि हुई है, लेकिन आउट-ऑफ-पॉकेट एक्सपेंडेचर (OOPE) यानी अपनी जेब से खर्च करने के मामले में कोई खास सुधार नहीं दिखा।

ग्रामीण भारत: सरकारी और अन्य स्वास्थ्य योजनाओं का कवरेज 13% से बढ़कर 46% हो गया है। अस्पताल में भर्ती होने पर खर्च होने वाले औसतन 33,000 रुपये के खर्च का 95% हिस्सा यानी करीब 31,500 रुपये मरीजों को खुद वहन करने पड़ रहे हैं।

शहरी भारत: यहां कवरेज 9% से बढ़कर 32% हुआ है। शहर में अस्पताल का औसत खर्च 47,000 रुपये है, जिसमें से 83% यानी करीब 39,000 रुपये मरीज अपनी जेब से दे रहे हैं।

देश में प्रति 1,000 व्यक्तियों पर अस्पताल में भर्ती होने की दर 29 पर स्थिर बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह दर 26 से बढ़कर 29 हुई है, जबकि शहरों में यह 34 से घटकर 32 पर आ गई है। पिछले 7-8 वर्षों में अस्पताल में भर्ती होने का खर्च लगभग दोगुना हो गया है। ग्रामीण इलाकों में इलाज की लागत में 97% की भारी बढ़ोतरी देखी गई है।

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