डीमैट खातों में तेज वृद्धि, लेकिन वैश्विक स्तर की तुलना में पहुंच काफी कम
मुंबई- भारतीय शेयर बाजार में डीमैट खातों में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है, बावजूद इसके वैश्विक मानकों की तुलना में पैठ काफी कम है। मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के अनुसार, डीमैट खाते की पहुंच अब भी केवल 12 प्रतिशत है, जो अमेरिका में 62 प्रतिशत की तुलना में काफी कम है। देश में डीमैट खाते 17.9 करोड़ हो गए हैं जो वित्त वर्ष 2022 में 9 करोड़ की तुलना में करीब दोगुना हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, डिस्काउंट ब्रोकर डिजिटल सुविधा के जरिये इसमें मदद कर रहे हैं, जिससे निचले स्तर के कस्बों और शहरों में जागरूकता बढ़ रही है और शेयर बाजार में निवेश किया जा रहा है। डीमैट खातों में उछाल बड़े पैमाने पर डिस्काउंट ब्रोकरों की ओर से विशेष रूप से छोटे शहरों और कस्बों में इक्विटी निवेश के बारे में जागरूकता बढ़ाने और अपनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का लाभ उठाने के कारण हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रेडिंग वॉल्यूम में वृद्धि तेजी से हुई है। पिछले पांच वर्षों में सभी सेगमेंट इक्विटी फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफएंडओ), कैश और कमोडिटीज में औसत दैनिक टर्नओवर कई गुना बढ़ गया है। इनमें से ऑप्शन सेगमेंट का योगदान प्रमुख रहा है। हालांकि, अंकुश लगाने के सेबी के उपायों से ऑप्शन सेगमेंट पर अस्थाई रूप से प्रभाव पड़ सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रेडिंग वॉल्यूम में किसी भी गिरावट का मुकाबला करने के लिए एक्सचेंजों को उत्पाद नवाचार पर ध्यान केंद्रित करना होगा। शेयरों की अधिक लिस्टिंग और बढ़ी हुई फ्री फ्लोट के साथ प्राथमिक बाजार के विस्तार से टर्नओवर की गति बढ़ने की संभावना है। इस रुझान से एक्सचेंजों और ब्रोकरों दोनों के लिए वॉल्यूम वृद्धि को समर्थन मिलने की उम्मीद है।

