जीडीपी के करीब पहुंचा शेयर बाजार का पूंजीकरण. 20 साल में 30 गुना बढ़ा
मुंबई- भारतीय शेयर बाजार का पूंजीकरण पहली बार 300 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। यह अब देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के करीब है। माच, 2023 में जीडीपी 3.75 लाख करोड़ डॉलर रही जबकि बाजार पूंजीकरण बृहस्पतिवार को 3.62 लाख करोड़ डॉलर के पार पहुंच गया।
अविकसित श्रेणी से उभरती महाशक्ति के रूप में पहचाने जाने तक भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत वृद्धि दिखाई है। दुनियाभर में पिछले साल से लेकर अब तक भारत की अर्थव्यवस्था सबसे तेजी से बढ़ी है। साथ ही विदेशी निवेशक इस साल जमकर पैसे लगा रहे हैं। इसके अलावा आने वाले समय में भी भारत की विकास दर की रफ्तार तेज रहने की उम्मीद है।
बाजार पूंजीकरण बढ़ने के मामले में केवल पहले की ही कंपनियों का योगदान नहीं है। बल्कि हर साल नई कंपनियों की सूचीबद्धता से भी पूंजीकरण में तेजी आई है। उदाहरण के तौर पर पिछले साल एलआईसी की सूचीबद्धता से 6 लाख करोड़ रुपये पूंजी बढ़ गई। इसी तरह से अन्य कंपनियों के भी बाजार में आने से पूंजीकरण पर सकारात्मक असर पड़ा।
सितंबर, 2003 में भारतीय बाजार का पूंजीकरण केवल 10 लाख करोड़ रुपये था। तब से अब तक यह 30 गुना बढ़कर 300 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। इसी दौरान सेंसेक्स 4,400 से करीब 15 गुना बढ़कर 65 हजार के पार हो गया है।
इस महीने में जून तिमाही के कंपनियों के वित्तीय परिणाम और 26 जुलाई को अमेरिकी फेडरल रिजर्व बैंक की बैठक का असर बाजारों पर दिखेगा। भारतीय कंपनियों के परिणाम अच्छे रहने की उम्मीद है। अगले हफ्ते से बड़ी कंपनियों के परिणाम आने शुरू हो जाएंगे। कोटक सिक्योरिटीज का अनुमान है कि सेंसेक्स की कंपनियों के फायदे सालाना आधार पर 18 फीसदी और निफ्टी50 कंपनियों का मुनाफा 25 फीसदी बढ़ सकता है।
शेयर बाजार का पूंजीकरण पहला 10 लाख करोड़ रुपये 2003 में हुआ था। उसके बाद 2007 में 50 लाख करोड़, 2014 में 100 लाख करोड़ और 2021 में 200 लाख करोड़ रुपये को यह पार कर गया। उसके बाद केवल दो सालों में बाजार की पूंजी 100 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 300 लाख करोड़ रुपये के पार हो गई।

