रीट और इनविट शिकंजे में, कर्ज के नाम पर फायदा आएगा टैक्स के दायरे में 

मुंबई- कर का दायरा बढ़ाने के लिए सरकार ने बुधवार को रीट और इनविट जैसे कारोबारी कारोबारी ट्रस्टों की ओर यूनिटधारकों को वितरित आय पर कर लगाने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, इसमें लाभांश, ब्याज या किराया शामिल नहीं है क्योंकि यह पहले से ही कर के दायरे में हैं। नए नियम के तहत वह रकम कर के दायरे में आएगी जो यूनिट धारकों को कर्ज के पुनर्भुगतान के रूप में दी जाती थी। नया नियम एक अप्रैल, 2024 से लागू होगा। इसका मतलब आकलन साल 2024-25 में इसे आयकर रिटर्न में दिखाना होगा। 

वर्तमान नियमों के मुताबिक, रीट और इनविट जैसे कारोबारी ट्रस्ट और यूनिट धारक इस कर के दायरे से बाहर हैं। वित्त बिल के अनुसार, कारोबारी ट्रस्ट अपने यूनिट धारकों को डेट के भुगतान के रूप में जो रकम दिखाता है, वह वास्तव में यूनिट धारक की आय है। इस पर कारोबारी ट्रस्ट या यूनिट धारक कोई कर नहीं देता है। इसके साथ यह भी स्पष्ट किया गया है कि व्यापार ट्रस्ट की किसी भी वितरण की गई आय पर दोहरा कर लगाने का उद्देश्य नहीं है। न ही उसे किसी विशेष टैक्सेशन व्यवस्था में लाने का है। 

हालांकि, यूनिट धारक द्वारा प्राप्त राशि को कर योग्य बनाने का प्रस्ताव है। डेलॉय इंडिया के पार्टनर हेमल मेहता ने कहा कि रीट और इनविट के लिए प्रस्तावित संशोधन यूनिटधारकों को ऋण चुकाने के वितरण से संबंधित है। इस रकम के वितरण को एक प्रोत्साहन के रूप में भी दिया जाता था। कोई विदेशी निवेशक अगर ऐसी रकम प्राप्त करता है तो उसे अब 40 फीसदी टैक्स और सरचार्ज देना होगा। 

रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (रीट) ऐसी स्कीमें हैं जो निवेशकों से पैसा जुटाकर उसे रियल एस्टेट में निवेश करती हैं। रीट की 80 फीसदी रकम को आय उत्पन्न करने वाली संपत्तियों में निवेश किया जाता है। साथ ही 90 फीसदी उत्पन्न हुई रकम को वितरित करने की जरूरत होती है। इनविट रीट जैसा ही है, लेकिन इसका निवेश इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्टों तक सीमित होता है। इन प्रोजेक्टों में सड़क, पुल, पावर ग्रिड इत्यादि शामिल हैं। 

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