खाने के तेल में लीटर पर 10 रुपये की कमी, पूरे देश में एक कीमत लागू 

मुंबई- खाने के तेल की कीमतों में एक बार फिर गिरावट आने की उम्मीद है। बुधवार को सरकार के साथ हुई बैठक में तेल कंपनियों को प्रति लीटर 10 रुपये तक भाव घटाने को कहा गया है। खाद्य सचिव सुधांशु पांडे ने बैठक के बाद कहा कि कंपनियों को अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) पूरे देश में एक समान रखने होंगे।  

पांडे ने बताया कि आने वाले समय में कीमतों में इस कमी का असर दिखेगा। पिछले एक महीने में जिस तरह से वैश्विक स्तर पर तेल के भाव घटे हैं, उसका फायदा तेल कंपनियों को बिना किसी देरी के ग्राहकों को देना चाहिए। सूत्रों ने कहा कि खाने के अलग-अलग तेलों के दाम पिछले एक महीने में 350 से 450 डॉलर प्रति टन घट गए हैं।  

भारत अपनी जरूरतों का करीब 60 फीसदी तेल आयात करता है। इसमें पाम तेल भी है, जो मुख्य रूप से मलयेशिया और इंडोनेशिया से आयात होता है। जबकि सूर्यमुखी का तेल रूस और यूक्रेन से आता है। 16 जून को तेल कंपनियों ने ब्रांडेड खाद्य तेल का भाव 15 रुपये प्रति लीटर तक घटा दिया था। कंपनियों का कहना था कि जून में मांग बढ़ने और आपूर्ति ज्यादा होने से ऐसा फैसला लिया गया था। उस समय पाम तेल 7 से 8 रुपये तक सस्ता हुआ था।  

सूर्यमुखी तेल 10-15 रुपये और सोयाबीन तेल 5 रुपये लीटर कम हुआ था। मई में 10-11 लाख टन तेल का आयात हुआ था जबकि जून में भी 10 लाख टन तेल के आयात की उम्मीद है। उपभोक्ता मंत्रालय की वेबसाइट के मुताबिक, एक महीने पहले सरसों तेल की कीमत 182.79 रुपये लीटर थी, जो अब 177.37 रुपये हो गई है।  

इसी दौरान वनस्पति तेल की कीमत 166 रुपये से घटकर 161.49 रुपये पर आ गई है। सोयाबीन तेल का भाव 169 से गिरकर 164 रुपये पर आ गया है। सूर्यमुखी तेल का भाव 192 रुपये से कम होकर 185.77 रुपये पर आ गया है। पाम तेल 156 से घटकर 144 रुपये पर आ गया है। हालांकि मूंगफली तेल का भाव 187.9 रुपये पर ही स्थिर है। 

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