IDBI बैंक में अपना हिस्सा बेचेगी सरकार, कनाडाई कंपनी खरीदेगी 60.72% शेयर
मुंबई- आईडीबीआई बैंक में सरकार 60.72 पर्सेंट अपना हिस्सा बेचेगी। केंद्र सरकार और LIC मिलकर बैंक में यह हिस्सा कनाडाई अरबपति प्रेम वत्स की कंपनी ‘फेयरफैक्स’ को बेचेंगे।
यह सौदा ₹52,877 करोड़ में तय हुआ है। 2022 में टाटा ग्रुप को एअर इंडिया बेचे जाने के बाद, यह केंद्र सरकार का सबसे बड़ा विनिवेश है। रकम के लिहाज से यह एअर इंडिया की ₹18 हजार करोड़ की डील से भी लगभग तीन गुना बड़ा सौदा है।
आईडीबीआई बैंक के शेयर में 14 अक्तूबर को पंख लग गए। एक समय शेयर 13 फीसदी तक चढ़ गया था। हालांकि, बाद में तेजी थोड़ी सुस्त पड़ी। कारोबार के अंत में यह 8.33 फीसदी चढ़कर 89.85 रुपये पर बंद हुआ। इस साल मार्च के अपने निचले स्तर से यह शेयर 46 फीसदी चढ़ा है।
इस डील पर इस साल के अंत तक हस्ताक्षर हो जाने की उम्मीद है। उसके बाद आईडीबीआई बैंक का नियंत्रण फेयरफैक्स की सब्सिडियरी कनाडा इंक के पास चली जाएगी। IDBI बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने के बाद भी बैंक में सरकार के पास 15% और LIC के पास 19% शेयर रहेंगे। यानी कुल हिस्सेदारी 34% बनी रहेगी।
सरकार ने बैंक के एक शेयर की सही कीमत यानी फेयर वैल्यू तय करने के लिए दो स्वतंत्र एजेंसियों की मदद ली थी। इन एजेंसियों ने कैलकुलेशन के बाद बताया कि IDBI बैंक के एक शेयर की तय कीमत ₹75.99 होनी चाहिए।
कनाडाई कंपनी फेयरफैक्स ने सरकार के तय किए गए इस बेस प्राइस से ज्यादा यानी ₹81 प्रति शेयर के हिसाब से बोली लगाई। चूंकि फेयरफैक्स की बोली सरकार के तय अनुमान से प्रति शेयर ₹5.01 ज्यादा थी, इसलिए सरकार ने इसे स्वीकार कर लिया।
इसकी शुरुआत सबसे पहले 7 अक्टूबर 2022 को हुई थी, जब सरकार ने बैंक को खरीदने के इच्छुक खरीदारों से आवेदन मंगाए थे। शुरुआत में 5 बड़ी कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई। सरकार ने जब सभी के दस्तावेजों और नियमों की जांच की, तो इनमें से 4 कंपनियां ही योग्य पाई गईं।

