इरडाई का प्रस्ताव पास हुआ तो बैंकों को जमकर होगा घाटा, इंडसइंड को सर्वाधिक
मुंबई- भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने डिस्ट्रीब्यूशन में सुधारों पर एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसमें लाइफ और जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के लिए प्रबंधन खर्च (EoM) की सीमा घटाने और अलग-अलग इंश्योरेंस सेगमेंट के लिए कमीशन की अधिकतम सीमा तय करने का प्रस्ताव है। कमीशन पर लगी ऐसी सीमाएं वित्त वर्ष 2024 से हटा दी गई थीं, जिन्हें फिर से लागू करने का प्रस्ताव आ गया है।
इरडाई के कंसल्टेशन पेपर में बैंकों के जरिए बीमा बेचने (Bancassurance) पर खास ध्यान दिया है। कई इंश्योरेंस कंपनियों से टाई अप करने वाले बैंकों को जीवन बीमा के नए कारोबार के प्रीमियम का औसतन 33% तक पेमेंट मिला। इसके मुकाबले सिर्फ एक बीमा कंपनी के साथ काम करने वाले बैंकों को औसतन 13% भुगतान से ही संतोष करना पड़ा।
ब्रोकरेज फर्म जेएम फाइनेंशियल ने इरडाई के प्रस्तावों के संभावित परिणामों पर एक रिसर्च रिपोर्ट पेश की है। उसके आकलन और कंपनियों के खुलासे के मुताबिक, उज्जीवन, एयू, आईडीएफसी, बंधन, डीसीबी और एक्सिस जैसे बैंकों की वित्त वर्ष 2026 की औसत संपत्ति पर रिटर्न (RoA) में करीब 18 से 25 बेसिस पॉइंट का योगदान बीमा से मिलने वाली फीस का था।
वहीं, गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों (NBFCs) में एलटीएफ, होम फर्स्ट, सीआईएफसी, आधार, एमएमएफएस और एचडीबी को वित्त वर्ष 2026 के आरओए में बीमा से मिलने वाली फीस का करीब 40 से 80 बेसिस पाइंट योगदान रहा। इरडाई ने इस प्रस्ताव पर 25 अक्टूबर, 2026 तक सुझाव मांगे हैं।
कमीशन की सीमा तय होने से उन बैंकों पर ज्यादा असर पड़ेगा जो बीमा कंपनियों के साथ काम करते हैं और ग्राहकों को बीमा बेचने के लिए ज्यादा इंसेंटिव देते हैं। इसके मुकाबले वे बैंक कम प्रभावित होंगे जो मुख्य रूप से एक ही बीमा कंपनी के साथ काम करते हैं और अपने प्रमोटर की बीमा कंपनी के प्रॉडक्ट बेचते हैं।
जेएम फाइनेंशियल ने अपनी रिसर्च में जिन बैंकों को कवर किया है, उनके लिए बीमा बेचने से होने वाली कुल आय टैक्स से पहले कुल मुनाफा (PBT) के मुकाबले वित्त वर्ष 2023 में 3.5% थी, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 5.1% हो गई।
बैंकों की औसत संपत्ति के मुकाबले भी यह आय वित्त वर्ष 2023 के 4 बेसिस पॉइंट से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 7 बेसिस पॉइंट हो गई है। यह बढ़ोतरी उस समय हुई जब 2023 में ईओएम सिस्टम लागू हुई और कमीशन पर लगी सीमाएं हटा दी गई थीं। इस आय का बड़ा हिस्सा जीवन बीमा से आता है।
जीवन बीमा से मिलने वाली आय बैंकों की कुल बीमा आय का करीब 84% है और कुल पीबीटी का लगभग 4.3% है। इसके मुकाबले जनरल इंश्योरेंस से मिलने वाली आय करीब 0.9% पीबीटी पर लगभग स्थिर रही है। इसलिए प्रस्तावित नियमों में लाइफ इंश्योरेंस के कमीशन में कटौती, खासकर क्रेडिट लाइफ और कम अवधि वाले सेविंग्स प्रॉडक्ट्स पर कमीशन घटाने का प्रस्ताव, बैंकों की बीमा आय के सबसे बड़े हिस्से को प्रभावित कर सकता है।
दरअसल टैक्स से पहले के लाभ की बात करें तो बीमा से सबसे ज्यादा कमाई इंडसइंस बैंक की होती है। इसका कुल योगदान 75 फीसदी है। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की कमाई में बीमा का योगदान 48 पर्सेंट है जबकि बंधन बैंक में 30 पर्सेंट से ज्यादा योगदान है। आरबीएल के टैक्स से पहले लाभ में बीमा से कमाई का योगदान 28 पर्सेंट है जबकि डीसीबी बैंक में 21 फीसदी है। एचडीएफसी बैंक में योगदान 7.3 फीसदी, आईसीआईसीआई बैंक में 0.61 फीसदी, एक्सिस बैंक में 12.50 फीसदी, कोटक में 5.8 फीसदी और यस बैंक में 19 फीसदी से ज्यादा योगदान है।

