अक्तूबर में बढ़ सकता है लोन, आपकी किस्त होगी महंगी, आरबीआई की योजना
मुंबई- खुदरा महंगाई बढ़ने और वैश्विक स्तर पर तमाम कारणों के चलते आरबीआई अक्तूबर में रेपो रेट बढ़ा सकता है। इससे आपके सभी तरह के लोन की किस्त भी बढ़ जाएगी।
भारतीय रिजर्व बैंक की नीतिगत दर तय करने वाली छह सदस्यीय समिति ब्याज दरों में कम से कम 50 आधार अंक की वृद्धि कर सकती है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि अक्टूबर की नीतिगत दर बैठक में 25 आधार अंक और फिर दिसंबर में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी हो सकती है। दरअसल, वित्त वर्ष 27 की तीसरी तिमाही में महंगाई के 6.1 प्रतिशत के चरम पर पहुंचने की आशंका है और यह रिजर्व बैंक के महंगाई के ऊपरी दायरे की सीमा से अधिक होगी। हालांकि वित्त वर्ष 27 की चौथी तिमाही में कमी आ सकती है। पश्चिम एशिया में फिर से तनाव बढ़ने के बीच कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं। रिजर्व बैंक की ब्याज दर संबंधित फैसले को प्रभावित करने वाले कुछ मुख्य कारक है।
खुदरा महंगाई अगस्त, 2026 में बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 4.45 प्रतिशत थी। इसमें लगभग सभी क्षेत्रों में व्यापक बढ़ोतरी देखी गई। ग्रामीण महंगाई बढ़कर 5.23 प्रतिशत हो गई जबकि शहरी महंगाई 4.31 प्रतिशत रही। चुनिंदा चीजों की कीमतें बढ़ने के कारण खाद्य महंगाई बढ़कर 5.66 प्रतिशत हो गई। मुख्य महंगाई (जिसमें भोजन और ईंधन, घरेलू सामान और सेवाएं और परिवहन शामिल नहीं हैं) जुलाई के 3.87 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 4.16 प्रतिशत हो गई।
एचएसबीसी की मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी के नेतृत्व में बैंक के अर्थशास्त्रियों ने बताया कि सितंबर में महंगाई 5.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसका कारण यह है कि महीने के पहले 10 दिनों में सब्जियों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर भी व्यापक दबाव बन रहा है। त्योहारी मौसम से पहले चीनी और खाद्य तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। कीमतें बढ़ने की इस रफ्तार के मद्देनजर वित्त वर्ष 27 की तीसरी तिमाही में औसत महंगाई 4.9 प्रतिशत के आसपास रहने का अनुमान है और यह रिजर्व बैकं के 4.7 प्रतिशत के अनुमान से अधिक है।
अगर RBI ब्याज दरें बढ़ाता है, तो खासकर फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन और दूसरे लोन की EMI बढ़ सकती है। यानी आने वाले समय में लोन लेना महंगा हो सकता है और पुराने लोन की EMI पर भी असर पड़ सकता है। ICRA की चीफ इकोनॉमिस्ट अदिति नायर ने कहा, ‘अगर अगली MPC बैठक तक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत मिलते हैं, तो इसका असर महंगाई पर पड़ सकता है। ऐसे में ब्याज दर बढ़ाने का फैसला दिसंबर के बजाय अक्टूबर में ही हो सकता है।’
नए होम लोन और दूसरे फ्लोटिंग रेट वाले लोन पर भी ब्याज ज्यादा हो सकता है। इसलिए अगर आप आने वाले महीनों में घर खरीदने या बड़ा लोन लेने की तैयारी कर रहे हैं, तो ब्याज दरों पर नजर रखना जरूरी होगा। हालांकि, EMI में कितना बदलाव होगा, यह बैंक की ब्याज दर, आपके बकाया लोन और बाकी अवधि पर निर्भर करेगा।

