बेसिक सैलरी 25,000 या इससे कम तो पीएफ जरूर कटेगा, 12 साल बाद बदलाव
मुंबई- ईपीएफओ में जरूरी तौर पर शामिल होने के लिए वेतन की ऊपरी सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये की जाएगी। सरकार का अनुमान है कि इससे 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारी ईपीएफओ से जुड़ेंगे।
अभी तक कोई नया कर्मचारी नौकरी शुरू करता था और उसका वेतन 15,000 रुपये महीने से ज्यादा था, तो वह अपने आप जरूरी ईपीएफ कवरेज में नहीं आता था। अब यह सीमा बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दी गई है। इससे 15,000 रुपये से ज्यादा और 25,000 रुपये तक वेतन पाने वाले बड़ी संख्या में कर्मचारियों को भी जरूरी ईपीएफ कवरेज में लाया जा सकेगा।
पीएफ में बचत, पेंशन और बीमा जैसी सुविधाओं का फायदा मिलेगा। ईपीएफ के जरिए कर्मचारी के रिटायरमेंट के लिए पैसा जमा होता है। कर्मचारी पेंशन योजना यानी ईपीएस के तहत पेंशन की सुविधा मिलती है।
ईपीएफओ की वेतन सीमा में करीब 12 साल बाद बदलाव किया गया है। सितंबर 2014 में इस सीमा को बढ़ाकर 15,000 रुपये महीना किया गया था। उसके बाद से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ था। सरकार का कहना है कि पिछले 12 वर्षों में लोगों की कमाई और वेतन बढ़े हैं। कई राज्यों और अलग-अलग तरह की नौकरियों में न्यूनतम वेतन भी 15,000 रुपये की मौजूदा सीमा के करीब पहुंच गया है। इसी को देखते हुए अब वेतन सीमा बढ़ाकर 25,000 रुपये की गई है।
25000 रुपये की सीमा सैलरी और DA पर लागू होती है, पूरी CTC या ग्रॉस सैलरी पर नहीं। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि अभी देश में 7.89 करोड़ लोग पीएफ के दायरे में आते हैं। इससे पहले 2014 में पीएफ के लिए बेसिक सैलरी की लिमिट ₹6500 से बढ़ाकर ₹15 हजार की गई थी।
मान लीजिए आपकी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता मिलाकर ₹30,000 है, तो आप सरकार के ₹25,000 वाले नियम के दायरे से बाहर आते हैं। इसका सीधा सा मतलब यह है कि कंपनी के लिए आपका PF काटना कानूनन जरूरी नहीं है। ऐसे में आपके पास और कंपनी के पास दो रास्ते हैं।
पहला रास्ता यह है कि अगर आप और कंपनी सहमति से पीएफ काटते हैं तो और यह पूरी 30000 की सैलरी पर लागू होता है तो आपकी जेब से 3600 रुपये महीने कटेगा यानी 12 फीसदी। कंपनी भी इतनी ही राशि जमा करेगी। दूसरा रास्ता यह है कि यदि कंपनी 25000 की सीमा पर पीएफ काटना चाहे तो आपकी जेब से 3000 रुपये और कंपनी देगी 3000 रुपये।

