राजीव कुमार से भी नहीं पटी जगदीशन की, मतभेद के चलते बैंक से जाना पड़ा

मुंबई- पहले अतानु चक्रवर्ती और अब राजीव कुमार। एचडीएफसी बैंक के दोनों चेयरमैन से इसके एमडी एवं सीईओ शशिधर जगदीशन की नहीं पटी। यही कारण है कि अंत में उनको बैंक को छोड़ना पड़ रहा है।

देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक HDFC बैंक में लीडरशिप को लेकर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। बैंक के चेयरमैन राजीव कुमार और CEO शशिधर जगदीशन के बीच कामकाज और प्राथमिकताओं को लेकर मतभेद सामने आए हैं। इसके बाद जगदीशन ने अपने पद से हटने का फैसला किया है।

61 साल के शशिधर जगदीशन पिछले करीब तीन दशक से HDFC बैंक से जुड़े हुए हैं। उनका मौजूदा कार्यकाल अगले महीने 26 अक्टूबर को खत्म हो रहा है। उनके अचानक पद छोड़ने के फैसले ने बैंक के साथ साथ पूरे बैंकिंग सेक्टर और शेयर बाजार को भी हैरान कर दिया है।

पूर्व वित्त सचिव और पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने जून में HDFC बैंक के चेयरमैन का पद संभाला था। पद संभालने के बाद से ही उन्होंने बैंक के कामकाज में बड़े बदलावों की जरूरत बतानी शुरू कर दी। उन्होंने CEO शशिधर जगदीशन के सामने चार मुख्य बातें रखीं।

इन तीन बातों में बैंक को ज्यादा तेजी से कर्ज बांटने की जरूरत है।बैंक के कामकाज में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल और आक्रामक तरीके से बढ़ाया जाए और बैंक से जुड़े पुराने और लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों का निपटारा किया जाए। साथ ही टीम में बदलाव किया जा रहे जिसमें CEO के साथ काम कर रहे कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को हटाकर पूरी टीम में बदलाव किया जाए।

जगदीशन पिछले छह साल से बैंक के CEO थे। वह अपने साथ काम कर रहे अधिकारियों को हटाने और इन दबावों को मानने के पक्ष में नहीं थे। उन्होंने चेयरमैन की मांगों का विरोध किया और खुद ही पद छोड़ने का फैसला कर लिया।

इसके बाद शनिवार को बहुत कम समय के नोटिस पर बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की एक आपात बैठक बुलाई गई। बैठक में जगदीशन ने साफ कर दिया कि वह तीसरे कार्यकाल के लिए अपनी दावेदारी नहीं करेंगे।

बोर्ड के कई निदेशकों ने उन्हें अपना फैसला बदलने के लिए मनाने की कोशिश की, लेकिन जगदीशन अपने फैसले पर कायम रहे। जगदीशन के अचानक पद छोड़ने के फैसले से HDFC बैंक का मैनेजमेंट भी असहज स्थिति में आ गया है। हालत यह है कि नए CEO की तलाश के लिए बैंक की ‘नॉमिनेशन एंड रेमुनरेशन कमेटी’ ने पहले से किसी सर्च फर्म को नियुक्त नहीं किया था। अब बैंक जल्द से जल्द एग्जीक्यूटिव सर्च फर्म ‘ईगॉन जेंडर’ (Egon Zehnder) को नए CEO की तलाश की जिम्मेदारी देने की तैयारी कर रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, चेयरमैन राजीव कुमार बैंक के शीर्ष पद पर किसी बाहरी व्यक्ति को लाने के पक्ष में हैं। उनका मानना है कि बैंक के अंदर मौजूद संभावित उम्मीदवार उतनी तेजी से फैसले लेने और आक्रामक तरीके से काम करने वाले नहीं हैं, जितनी जरूरत बैंक को तेज ग्रोथ और बेहतर रणनीति के लिए है।

समय की कमी को देखते हुए राजीव कुमार को फिलहाल एक अस्थायी व्यवस्था का सहारा लेना पड़ सकता है। इसके तहत बैंक के मौजूदा डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर कैजाद भरूचा जैसे किसी अंदरूनी अधिकारी को करीब 1 साल के लिए CEO बनाया जा सकता है। इस दौरान बैंक को स्थायी CEO की तलाश पूरी करने का समय मिल जाएगा।

सीईओ जगदीशन का कार्यकाल भी कई विवादों से घिरा रहा।बैंक के दुबई ऑपरेशन्स में कुछ कमियां सामने आईं। इसके अलावा डिपॉजिट संभालने के तरीके और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को लेकर भी रिजर्व बैंक ने बैंक को फटकार लगाई।इसी साल जुलाई में बोर्ड ने ‘बिजनेस ओवररीच’ के मामले में जगदीशन और दो अन्य अधिकारियों पर पेनल्टी लगाई थी। इससे पहले बैंक के पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने यह कहते हुए पद छोड़ दिया था कि बैंक के काम करने का तरीका उनके व्यक्तिगत मूल्यों से मेल नहीं खाता।

बैंक की अंदरूनी बैठकों में हुई बातचीत मीडिया तक पहुंच रही थी। इससे जगदीशन को लगा कि उनके कार्यकाल को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।रिजर्व बैंक के अंदर भी जगदीशन को दूसरा कार्यकाल देने को लेकर एक राय नहीं थी। कुछ डिप्टी गवर्नर उनके पक्ष में थे, जबकि कुछ लोग विवादों को देखते हुए इसके पक्ष में नहीं थे।

इन वजहों से इस साल बैंक का शेयर करीब 28% तक गिर चुका है, जबकि बैंक निफ्टी में करीब 3% की गिरावट आई है। 2003 के बाद से यह बैंक का सबसे खराब प्रदर्शन बताया जा रहा है। पिछले साल के रिकॉर्ड स्तर से बैंक के मार्केट कैप में 60 अरब डॉलर से ज्यादा की कमी आई है और शेयर फरवरी 2024 के निचले स्तर तक पहुंच गए हैं।

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