पहली तिमाही में देश की जीडीपी में 7.8 प्रतिशत की ग्रोथ, इन सेक्टरों का योगदान
मुंबई- पश्चिम एशिया में जारी तनाव से बढ़ती महंगाई के बावजूद भारत की इकोनॉमी (GDP) इस साल की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून में 7.8% रही। यह RBI के 7% अनुमान से ज्यादा है। एक साल पहले की इसी तिमाही में यह 6.9% की दर से बढ़ी थी।
फाइनेंस, रियल एस्टेट, आईटी और प्रोफेशनल सर्विसेज सेक्टर में 12% से ज्यादा की बढ़त रही। इससे महंगाई का असर GDP ग्रोथ पर नहीं पड़ा। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के आंकड़ों के मुताबिक, रियल जीडीपी 7.8% की दर से बढ़कर ₹81.36 लाख करोड़ रही। एक साल पहले यह ₹75.46 लाख करोड़ थी।
वहींरियल जीवीए 8.2% बढ़कर ₹73.82 लाख करोड़ रहा। नॉमिनल जीडीपी 10.3% बढ़कर ₹88.27 लाख करोड़ दर्ज की गई। पिछले साल यह ₹80 लाख करोड़ थी। नॉमिनल जीवीए 11.5% की बढ़त के साथ ₹80.53 लाख करोड़ तक पहुंच गया। पश्चिम एशिया में युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं और ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इसके चलते भारत में महंगाई बढ़ गई है।
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच 7.8% की ग्रोथ इस बात का संकेत है कि घरेलू मांग और निवेश दोनों मजबूत हैं। पैसेंजर व्हीकल और हाउसहोल्ड व्हीकल रजिस्ट्रेशन में 13.9% और 15.9% की ग्रोथ यह दर्शाती है कि आम उपभोक्ता की खरीदारी क्षमता और विश्वास दोनों बने हुए हैं।
5 अगस्त को जारी RBI के अनुमान के अनुसार, पूरे वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP ग्रोथ रेट 6.7% रहने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर आंकड़े आने के बाद इसमें भी समीक्षा की संभावना बन सकती है। पहली तिमाही के आंकड़े मजबूत हैं, लेकिन अगर पश्चिम एशिया में संकट लंबा खिंचता है, तो कच्चे तेल की ऊंची कीमतें लागत बढ़ा सकती हैं।
इससे कंपनियों के मार्जिन और कंज्यूमर स्पेंडिंग पर असर पड़ सकता है।

