राजेश एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन बोले, एलआईसी का ऑफिस कहां है, मुझे पता नहीं
मुंबई- सेबी के अंतरिम आदेश पर राजेश एक्सपोर्ट्स ने सफाई दी है। कंपनी के प्रमोटर और चेयरमैन का कहना है कि 15.15 लाख करोड़ रुपए के घोटाले की बातें पूरी तरह से गलत हैं। यह केवल आंकड़ों को गलत तरीके से पढ़ने के कारण पैदा हुआ कन्फ्यूजन है।
एक शेयरधारक की शिकायत पर सेबी ने यह जांच शुरू की थी। इसमें कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड में गड़बड़ी का आरोप लगाया गया था। सेबी ने अपने 109 पन्नों के आदेश में कहा कि कंपनी ने अपने कुल राजस्व का 99% हिस्सा गलत तरीके से दिखाया है।
उन्होंने कहा, यह सेबी का अंतरिम आदेश है… फाइनल ऑर्डर नहीं है। ये आरोप भी नहीं ऑब्जर्वेशन्स है। पिछले 2-3 दिनों से मीडिया रिपोर्ट्स में जो दावा किया जा रहा है कि राजेश एक्सपोर्ट्स में 15.15 लाख करोड़ रुपए का कोई घोटाला हुआ है, रेवेन्यू गलत दिखाया गया है या फिर झूठा एक्सपोर्ट किया गया है.. ऐसा कुछ भी नहीं है। ये सिर्फ समझने का मामला है।
SEBI का संदेह यह है कि कंपनी ने 5 सालों (2021-2025) के दौरान अपनी बिक्री को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया है। लेकिन, बात ये हैं कि SEBI ने आंकड़ों को समझने में थोड़ी चूक की है। उन्होंने शायद बिक्री के कुल आंकड़ों की जगह कंपनी के EBITDA के आंकड़ों को जोड़ लिया, जिससे उन्हें कुल सेल्स और बुक्स में बड़ा अंतर दिखाई दिया और यह संदेह पैदा हुआ।
यह रेवेन्यू राजेश एक्सपोर्ट्स की स्विट्जरलैंड स्थित एक स्टेप-डाउन सब्सिडियरी कंपनी वालकाम्बी का है। वालकाम्बी दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे प्रतिष्ठित गोल्ड रिफाइनरी है। यह कंपनी दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों और बड़े बुलियन डीलर्स को सोना बेचती है। कंपनी ने साल 2020 से 2025 तक के 5 सालों की बिक्री के बिल्कुल सही आंकड़े SEBI को सौंपे हैं।

