देश में न्यूजीलैंड की वाइन-कीवीफ्रूट जैसे सामान सस्ते होंगे, 5000 को वर्किंग वीजा
मुंबई- भारत-न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) साइन हो गया है। अब भारत से न्यूजीलैंड भेजे जाने वाले लेदर प्रोडक्ट्स, टेक्सटाइल, प्लास्टिक और इंजीनियरिंग गुड्स जैसे सामानों पर कोई एक्सपोर्ट ड्यूटी नहीं लगेगी। जिससे इन श्रम-प्रधान क्षेत्रों यानी लेबर इंटेंसिव सेक्टर्स को सीधा लाभ होगा।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह FTA विश्वास, साझा मूल्यों और टिकाऊ आर्थिक विकास के साझा विजन को दर्शाता है। यह समझौता भारत के लिए ओशिनिया और प्रशांत द्वीपीय बाजारों तक पहुंचने का गेटवे भी बनेगा।
इस समझौते से कृषि सेक्टर को भी फायदा होगा। शहद, मसाले, अनाज, फल, कॉफी और कोको जैसे उत्पादों को अब न्यूजीलैंड का बेहतर बाजार मिलेगा। इससे किसानों और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर के लिए नए मौके खुल सकते हैं। इसमें शहद का शामिल होना अहम है, क्योंकि इससे वैल्यू-एडेड एग्री प्रोडक्ट्स को बढ़ावा मिलेगा।
भारत ने भी कुछ सेक्टर में टैरिफ कम किए हैं, लेकिन पूरी तरह खुलापन नहीं दिया है। करीब 70% टैरिफ लाइनों पर छूट दी गई है, जो कुल व्यापार का 95% हिस्सा कवर करती है। वहीं करीब 30% सेक्टर को पूरी तरह बाहर रखा गया है, ताकि देश के संवेदनशील सेक्टर सुरक्षित रहें।
एग्रीमेंट का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच बाइलेटरल ट्रेड को दोगुना करना और भारत में बड़े विदेशी निवेश को आकर्षित करना है। एग्रीमेंट के तहत न्यूजीलैंड से अगले 15 साल में भारत में 1.8 लाख करोड़ रुपये का निवेश आने की उम्मीद है।
सर्विस सेक्टर में भारत ने IT, शिक्षा, फाइनेंशियल सर्विसेज, कंस्ट्रक्शन और टूरिज्म जैसे हाई-वैल्यू सेक्टरों में बाजार पहुंच हासिल की है। समझौते के तहत AYUSH, योगा इंस्ट्रक्टर्स, इंडियन शेफ और म्यूजिक टीचर्स के लिए भी रास्ते खुलेंगे।
FTA में एक नया टेम्परेरी एम्प्लॉयमेंट एंट्री वीजा का रास्ता बनाया गया है। इसके तहत हर साल 5,000 भारतीय स्किल्ड प्रोफेशनल्स न्यूजीलैंड में 3 साल तक काम कर सकेंगे। इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर और एजुकेशन सेक्टर में खासतौर पर मौके होंगे। इसके अलावा भारतीय वाइन और स्पिरिट्स को भी न्यूजीलैंड के बाजार में ड्यूटी फ्री एक्सेस मिलेगा।

