…तो निफ्टी गिरकर 21,000 तक आ जाएगा, यह है इसका कारण, 10 फीसदी टूटेगा

मुंबई- क्रूड ऑयल की कीमतें अगर अगले 3-4 महीनों तक 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी रहती हैं तो निफ्टी 50 गिरकर करीब 21,000 तक आ जाएगा। यह मौजूदा लेवल से और करीब 10 फीसदी की गिरावट होगी। यह अनुमान ब्रोकरेज फर्म एमके ग्लोबल ने जताया है। अमेरिका-इजरायल और ईरान की लड़ाई का असर शेयर बाजारों पर पड़ा है।

Emkay Global ने रिपोर्ट में कहा है कि बाजार में गिरावट अभी थमने के आसार नहीं हैं। हालांकि, इसे थोड़े समय की गिरावट के रूप में देखना चाहिए। उसने कहा है कि गिरावट के इस मौके का इस्तेमाल लंबी अवधि के लिहाज से कुछ ऐसे चुनिंदा शेयरों में निवेश के लिए करना चाहिए, जिनकी कीमतें काफी गिरी हैं।

26 फरवरी से 13 मार्च के बीच के 10 कारोबारी सत्रों में निफ्टी 9.2 फीसदी गिरा था। यह इस दौरान करीब 25,500 से 23,150 प्वाइंट्स पर आ गया था। हालांकि, इस हफ्ते मार्केट में कुछ रिकवरी आई है। 16 मार्च को निफ्टी में 1.1 फीसदी रिकवरी आई। 17 मार्च को भी इसमें 0.74 फीसदी तेजी दिखी। इसके बावजूद निफ्टी इस साल 9 फीसदी से ज्यादा टूटा है। यह 52 हफ्ते के अपने हाई से करीब 11 फीसदी नीचे है।

ब्रोकरेज फर्म ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मध्यपूर्व में चल रही लड़ाई का सबसे ज्यादा असर क्रूड ऑयल और गैस की सप्लाई पर पड़ा है। इसकी वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते समुद्री जहाजों का आवगमन रुकना है। अगर यह रास्ता बंद रहता है तो क्रू़ड की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं। इससे भारत की इकोनॉमी पर असर पड़ेगा। कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ में भी कमी आ सकती है।

ब्रोकरेज फर्म की रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्यपूर्व की लड़ाई लंबी चलने पर कई सेक्टर्स पर असर पड़ेगा। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, यूटिलिटीज, एयरलाइंस और ऑटो कंपनियों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। आईटी, फार्मा, मेटल्स और पावर पर इसका कम असर पड़ेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसा कोई सेगमेंट नहीं होगा जो क्रूड की ऊंची कीमतों के असर से पूरी तरह से अछूता होगा।

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