एनएसई के आईपीओ की तारीख हुई तय, मर्चेंट बैंकर बताएंगे कब आ रहा है इश्यू

मुंबई- नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अपने मेगा IPO के लिए करीब 20-21 इनवेस्टमेंट बैंकों को शॉर्टलिस्ट किया है। इनमें कोटक महिंद्रा कैपिटल, सिटी, JM फाइनेंशियल, जेपी मॉर्गन, HSBC सिक्योरिटीज और मॉर्गन स्टेनली भी शामिल हैं। इस बंपर इश्यू के लिए करीब 7 से 9 लॉ फर्म्स को भी शॉर्टलिस्ट किया गया है। आधिकारिक घोषणा जल्द ही होने की उम्मीद है।

एक्सचेंज मार्च 2026 के मध्य तक IPO के लिए एडवाइजर चुनने का प्लान बना रहा है। NSE ने फरवरी महीने की शुरुआत में नॉन-इंडिपेंडेंट डायरेक्टर और LIC के पूर्व MD तबलेश पांडेय की अध्यक्षता में IPO कमेटी बनाई थी। साथ ही लिस्टिंग प्रोसेस की देखरेख के लिए रॉथ्सचाइल्ड एंड कंपनी को एक इंडिपेंडेंट एडवाइजर अपॉइंट किया था।

NSE IPO पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। इसका मतलब है कि इसमें नए शेयर जारी नहीं होंगे। IPO का साइज 2.5 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, टेमासेक होल्डिंग्स पीटीई. और लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (LIC), NSE IPO में शेयर बेच सकते हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया लिमिटेड और एसबीआई कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड भी इस IPO में शेयर बेच सकते हैं।

उम्मीद है कि मौजूदा शेयरधारक कंपनी की इक्विटी का 4%-4.5% हिस्सा बेचेंगे। एक्सचेंज के सभी 190,000 शेयरधारकों को IPO के हिस्से के रूप में सेकेंडरी सेल में भाग लेने का विकल्प दिया जाएगा। NSE, बाजार हिस्सेदारी के मामले में देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। इसका IPO 8 साल से ज्यादा समय से पेंडिंग है। NSE ने दिसंबर 2016 में अपना IPO प्रॉस्पेक्टस दाखिल किया था। पिछले साल अगस्त में, NSE ने अपने प्रस्तावित IPO के लिए SEBI से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट के लिए आवेदन किया था। यह सर्टिफिकेट इसे मिल चुका है।

NSE जब पब्लिक होगा, तो वह अपने शेयर अपने प्लेटफॉर्म पर लिस्ट नहीं करेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि भारतीय नियम इसकी इजाजत नहीं देते हैं। ऐसे में इसे बीएसई के प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होना होगा। बीएसई भी एनएसई के प्लेटफॉर्म पर लिस्ट है।

एक्सचेंज को अपने IPO का ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) तैयार करने और फाइल करने में कुछ महीने लगेंगे, जिसके बाद SEBI डॉक्यूमेंट को रिव्यू करेगा और आगे की मंजूरी देगा। चौहान का कहना है कि IPO का मकसद मौजूदा शेयरहोल्डर्स को लिक्विडिटी उपलब्ध कराना है, न कि विस्तार के लिए फंडिंग जुटाना। एक्सचेंज अपने ग्रोथ प्लान को पूरा करने के लिए काफी प्रॉफिट में है।

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