एलपीजी की समस्या से क्लाउड किचन बंद, जोमैटो और स्विगी पर ऑर्डर घटे
मुंबई- ईरान-अमेरिका जंग के बीच भारत में कॉमर्शियल LPG सिलेंडर की किल्लत का असर फूड इंडस्ट्री पर भी दिखने लगा है। कई शहरों में रेस्टोरेंट और क्लाउड किचन गैस की कमी से जूझ रहे हैं। इस वजह से स्विगी और जोमैटो जैसे फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर ऑर्डर कम हो रहे हैं।
गिग वर्कर्स बताते है कि अब दिन के ऑर्डर 30 से घटकर सिर्फ 5-10 रह गए है, क्योंकि रेस्टोरेंट में मैन्यू बहुत छोटा हो गया है या रेस्टोरेंट बंद हो गए हैं। रोटी, डोसा, और पूरी जैसे ज्यादा गैस की खपत वाले फूड को मैन्यु से हटा दिया गया है। इसलिए लोग अपने पसंद का खाना ऑर्डर नहीं कर पा रहे हैं।
गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन का कहना है कि, जोमैटो और स्विगी जैसे प्लेटफार्मों पर फूड डिलिवरी ऑर्डर 50-60% कैंसल हो रहे है। ऐसे वक्त मे कई डिलीवरी पार्टनर जो पहले ज्यादा डिलीवरी करके ज्यादा कमाई करते थे अभी केवल दिन में चार-पांच ही डिलीवरी कर रहे हैं जिसके कारण उनके सामने भी आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है। इसे देखकर यूनियन ने सरकार के सामने कुछ जरूरी मांगे रखी हैं।
इनमें प्रभावित गिग वर्कर्स को तुरंत ₹10,000 की आर्थिक सहायता दी जाए। स्विगी और जोमैटो जैसे प्लेटफॉर्म पर आईडी डिएक्टिवेशन पर कम से कम 3 महीने की रोक लगाई जाए। डिलीवरी पार्टनर्स को इस अवधि में न्यूनतम इंसेंटिव/आय सुनिश्चित की जाए।
जेएम फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशनल सिक्योरिटीज के मुताबिक देश की प्रमुख क्विक सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) चेन में कुल कुकिंग का 60-65% हिस्सा एलपीजी पर निर्भर है। आमतौर पर इनके पास सिर्फ एक से दो हफ्ते का गैस स्टॉक होता है।
रेस्टोरेंट किचन में करीब 80% खाना एलपीजी सिलेंडर से पकाया जाता है, जबकि बाकी हिस्से में पाइप से आने वाली प्राकृतिक गैस जैसे विकल्पों का उपयोग होता है। इसलिए सप्लाई में थोड़ी भी रुकावट आने पर कुछ ही दिनों में किचन का काम प्रभावित हो जाता है।
मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग जैसे वाणिज्यिक प्रतिष्ठान देश की कुल एलपीजी खपत का 8-10% हिस्सा इस्तेमाल करते हैं। गैस संकट की वजह से आईटी कंपनी इंफोसिस के कई कैंपस की कैंटीन सेवाओं पर असर पड़ा हैं। कंपनी ने कर्मचारियों को सलाह दी है कि वे फिलहाल घर से खाना लेकर आएं, क्योंकि कैंटीन में सीमित मेन्यू ही उपलब्ध रहेगा।

