अग्रिम कर जमा करने वाले शीर्ष करदाताओं पर रखें बारीक नजरः सीबीडीटी

मुंबई- केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड यानी सीबीडीटी ने आयकर अधिकारियों को चालू वित्त वर्ष में प्रत्यक्ष कर संग्रह में सुधार की रणनीति के तहत अग्रिम कर जमा करने वाले शीर्ष करदाताओं पर बारीक नजर रखने का आदेश दिया है। साथ ही, छूट व कटौती के फर्जी दावों की पहचान करने का भी निर्देश दिया है। अग्रिम कर वह राशि है जो एक वित्त वर्ष में चार किस्तों के जरिये हर तिमाही के अंतिम महीने की 15 तारीख से पहले अग्रिम रूप से चुकाई जाती है।

सीबीडीटी ने 2025-26 के लिए केंद्रीय कार्ययोजना (सीएपी) जारी की है। यह योजना राजस्व संग्रह के संबंध में विभाग के लिए प्रमुख प्रदर्शन क्षेत्रों को आगे बढ़ाने के लिए मार्गदर्शक के रूप में कार्य करती है। फरवरी में पेश बजट अनुमानों के अनुसार, केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए प्रत्यक्ष करों के तहत 25.20 लाख करोड़ का लक्ष्य रखा है। इसमें कॉरपोरेट कर से 10.82 लाख करोड़, गैर-कॉरपोरेट कर 13.60 लाख करोड़ रुपये और प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) 78,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य शामिल है।

2024-25 के लिए शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह लक्ष्य से थोड़ा चूक गया है। यह 13.57 प्रतिशत बढ़कर 22.26 लाख करोड़ से अधिक रहा है। फरवरी में पेश बजट में लक्ष्य को संशोधित कर 22.37 लाख करोड़ कर दिया गया था। जुलाई, 2024 में यह 22.07 लाख करोड़ था। सीएपी ने आयकर विभाग को कर भुगतान के नकारात्मक रुझानों से निपटते हुए बेहतर कर संग्रह के लिए क्षेत्रीय विश्लेषण करने का सुझाव दिया है।

सीएपी का सुझाव है कि जहां राजस्व अपेक्षित स्तर पर नहीं है, वहां उचित कार्रवाई की जाए। विभाग को बकाया व चालू मांग को इकट्ठा करने पर विशेष जोर देने और गवर्नेंस का पालन नहीं करने वाले करदाताओं पर कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। आयकर आयुक्त (अपील) ने 2024-25 में 1.95 लाख करोड़ रुपये की मांगों की पुष्टि की है। मूल्यांकन अधिकारियों को चालू वित्त वर्ष के भीतर इस राजस्व को वसूलने के लिए हर संभव प्रयास करने को कहा गया है।

सीएपी ने कर विभाग से कार्यक्रम आयोजित करने और करदाताओं के बीच कटौतियों और छूटों के सही दावों के बारे में जागरूकता बढ़ाने तथा उन्हें अपडेट आयकर रिटर्न दाखिल करने के बारे में शिक्षित करने को भी कहा है। इससे सही आय की सूचना देने से चूक गए लोगों को समय मिलेगा। इन प्रयासों से संभावित रूप से नई कर व्यवस्था को चुनने वाले करदाताओं की संख्या में वृद्धि होगी। इस व्यवस्था में कोई कटौती या छूट नहीं है जिससे कटौतियों के दुरुपयोग में कमी आएगी।

कर विभाग को शीघ्र रिफंड जारी करने के लिए भी कहा गया है, ताकि ब्याज भुगतान और समग्र बजट पर नकारात्मक प्रभाव से बचा जा सके। विभाग ने 2024-25 के दौरान अब तक का सबसे अधिक 4.77 लाख करोड़ रुपये का रिफंड जारी किया। 2023-24 में जारी 3.78 लाख करोड़ रुपये के रिफंड की तुलना में 26.04 प्रतिशत अधिक है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *