उदय कोटक की सलाह, चीन को हरा नहीं सकते तो उससे पार्टनरशिप कीजिए
मुंबई- कोटक महिंद्रा बैंक के फाउंडर और डायरेक्टर उदय कोटक ने चीनी निवेश और उसके साथ मैन्युफैक्चरिंग पार्टनरशिप की वकालत की है। उनका कहना है कि भारत को इसके लिए तैयार रहना चाहिए। ग्लोबल ट्रेड टेंशन और बदलते जियोपॉलिटिकल रिश्तों के कारण निवेश का प्रवाह बदल रहा है। इसलिए देश को पश्चिमी देशों के अलावा पूंजी के अन्य स्रोतों पर भी ध्यान देना चाहिए।
कोटक ने एक कार्यक्रम में कहा, भारतीय और चीनी कंपनियों के बीच जॉइंट वेंचर घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने का रास्ता दिखा सकते हैं। उन्होंने इसकी तुलना चीन की उस पुरानी रणनीति से की जिसमें उसने अमेरिकी कंपनियों के साथ पार्टनरशिप की थी। चीन आज मैन्युफैक्चरिंग का हब बना हुआ है और पूरी दुनिया चीन में बने सामानों में अटी पड़ी है।
कोटक ने कहा, मुझे लगता है कि भारत के लिए ‘अगर आप उन्हें हरा नहीं सकते, तो उनके साथ हो जाइए’ वाली बात लागू होती है और हमें खुले मन से सोचना होगा। मुझे लगता है कि भारत में इसके शुरुआती संकेत दिख रहे हैं, जहां भारतीय कंपनियां ‘मेक इन इंडिया’ के लिए चीनी कंपनियों के साथ पार्टनरशिप कर रही हैं और चीनी कंपनियों का स्वागत है।”
कोटक ने कहा, “अगर भारत में मैन्युफैक्चरिंग के लिए चीनी और भारतीय कंपनियों के बीच जॉइंट वेंचर होते हैं, वही भारत के लिए भी आगे बढ़ने का रास्ता हो सकता है और भारत को अपने विकल्प खुले रखने होंगे। चीन ने कई साल पहले अमेरिका के साथ यही खेल खेला था।”
कोटक ने पश्चिमी निवेश पर भारत की पुरानी निर्भरता पर भी सवाल उठाए और कहा कि बदलते आर्थिक रिश्तों के कारण पूंजी के वैकल्पिक स्रोतों को खोजना जरूरी हो गया है। “इतिहास में भारत ने निवेश के लिए पश्चिम की ओर बहुत ज्यादा देखा है, लेकिन अब भारत के लिए अपने सभी विकल्प खुले रखने का समय आ गया है।”

