अदाणी- जीएमआर उतर सकते हैं एयरलाइन कारोबार में, नियम बदलने की उम्मीद
मुंबई- सरकार दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट के ऑपरेटरों के लिए एयरलाइन कंपनियों में हिस्सेदारी से जुड़े नियमों में बदलाव पर विचार कर रही है। अभी ये ऑपरेटर किसी एयरलाइन में 10% से ज्यादा हिस्सेदारी नहीं रख सकते। एविएशन मिनिस्टर के. राममोहन नायडू ने कहा कि सरकार इस पाबंदी को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा कर रही है।
इस कदम का मकसद देश के एविएशन मार्केट में IndiGo और Air India के दबदबे को कम करना है। दोनों एयरलाइंस मिलकर देश के करीब 90% घरेलू यात्रियों को संभालती हैं। भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एविएशन मार्केट है।
बेंगलुरु जैसे एयरपोर्ट के लिए अपनी एयरलाइन शुरू करने पर ऐसी रोक नहीं है। लेकिन दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट के ऑपरेशन और मैनेजमेंट एग्रीमेंट में ऐसी शर्त है, जो इनके ऑपरेटरों को किसी एयरलाइन पर नियंत्रण रखने से रोकती है।
नायडू ने कहा कि इस नियम में बदलाव पर विचार चल रहा है। हालांकि, अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। अगर यह पाबंदी हटती है तो Adani Group और GMR Airports के लिए एयरलाइन कारोबार में उतरने का रास्ता खुल सकता है। Adani Group मुंबई समेत आठ एयरपोर्ट ऑपरेट करता है। वहीं, GMR Airports दिल्ली समेत पांच एयरपोर्ट का संचालन करता है।
यानी नियम बदलने के बाद ये कंपनियां किसी एयरलाइन में बड़ी हिस्सेदारी खरीद सकती हैं या एयरलाइन कारोबार में उतरने की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं। एविएशन मिनिस्टर ने कहा कि भारत को कम से कम पांच एयरलाइंस की जरूरत है। इनमें से हर एयरलाइन के पास कम से कम 100 विमान होने चाहिए।
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय एविएशन मार्केट में कई बड़े बदलाव हुए हैं। Jet Airways और Go Airlines बंद हो गईं। दूसरी तरफ Vistara और AirAsia India का Tata Group की एयरलाइंस में विलय हो गया। इसके बाद बाजार में IndiGo और Air India की पकड़ काफी मजबूत हो गई। Akasa Air अभी नई एयरलाइन है। SpiceJet भी चुनौतियों से जूझ रही है। इसके अलावा कुछ छोटी क्षेत्रीय एयरलाइंस हैं, लेकिन उनकी बाजार हिस्सेदारी काफी कम है।

