नोएल टाटा की मुसीबत और बढ़ी, अब लाना ही होगा टाटा संस को आईपीओ
मुंबई- टाटा संस में इस समय सब कुछ सही नहीं चल रहा है। इसके मुखिया एन चंद्रशेखरन ने जहां इस्तीफा दे दिया वहीं बोर्ड में भी कई लोगों ने इस्तीफा दे दिया। हालात यह है कि अब आरबीआई ने भी टाटा संस के अप्लीकेशन को रिजेक्ट कर दिया है। यानी अब किसी भी हालत में टाटा संस को आईपीओ लाना होगा।
दरअसल, टाटा संस लंबे समय से आईपीओ नहीं लाने के लिए जोर आजमाइश कर रहा है। लेकिन शापुर पलोनजी लगातार टाटा संस को लिस्ट कराने का दबाव बना रहा है। कहा जा रहा है कि टाटा संस ने नोएल टाटा के कुछ लोगों को अपने पक्ष में लाकर आईपीओ लाने के लिए मजबूत जुगाड़ कर लिया था। उधर, नोएल टाटा लाख जुगाड़ कर रहे थे, फिर भी वे कुछ नहीं कर पाए।
बता दें कि टाटा संस ने स्वैच्छिक रूप से बतौर नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (एनबीएफसी) अपना सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने के लिए अप्लेकिशन दिया था। RBI के टाटा संस का अप्लिकेशन खारिज कर देने का मतलब है कि टाटा संस को अब अपर-लेयर एनबीएफसी के लिए तय केंद्रीय बैंक के नियमों का पालन करना होगा। उसे खुद को स्टॉक एक्सचेंजों में भी लिस्ट कराना होगा।
टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस को 3 साल में अपना IPO लाना ही होगा।
टाटा संस ने 2024 में ₹21,813 करोड़ का सारा कर्ज चुका दिया था। कंपनी का कहना था कि अब उस पर कोई कर्ज नहीं है, इसलिए उसे NBFC की कैटेगरी से बाहर किया जाए, लेकिन RBI ने इस मांग को नहीं माना।
इसका सीधा मतलब यह है कि टाटा संस को अब RBI के नियम मानने होंगे और अपने शेयर शेयर बाजार में लिस्ट कराने ही होंगे। रिजर्व बैंक के नियम के मुताबिक, ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा संपत्ति वाली हर वित्तीय कंपनी अपर-लेयर कैटेगरी में आती है। टाटा संस की कुल संपत्ति इस ₹1 लाख करोड़ की सीमा से बहुत ज्यादा है, इसलिए RBI ने उसे नियमों से छूट देने से इनकार कर दिया।
RBI ने सितंबर 2022 में टाटा संस को इस कैटेगरी में डाला था। नियम के मुताबिक कंपनी को 3 साल के भीतर यानी सितंबर 2025 तक शेयर बाजार में लिस्ट होना था। अर्जी पेंडिंग होने के कारण यह मामला टलता रहा, लेकिन अब अर्जी खारिज होने के बाद लिस्टिंग की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
शापूरजी पलोनजी (SP) ग्रुप की टाटा संस में 18.4% हिस्सेदारी है। टाटा संस के लिस्ट होने से उनकी हिस्सेदारी की सही वैल्यू सामने आएगी। भविष्य में अगर SP ग्रुप अपने शेयर बेचकर या गिरवी रखकर पैसा जुटाना चाहेगा, तो लिस्टेड कंपनी होने की वजह से यह काम काफी आसान हो जाएगा।

