सितंबर में 9,000 करोड़ रुपये के आईपीओ, अगले हफ्ते 11 आईपीओ खुलेंगे
मुंबई- सितंबर महीना अभी तक आईपीओ के लिहाज से अच्छा रहा है। अब तक कुल 2076 करोड़ रुपये के आईपीओ आए हैं। अगले हफ्ते आने वाले 11 आईपीओ की रकम मिला दें तो कुल रकम 9000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो जाएगी। ऐसे में अगर आप आईपीओ में पैसा लगाने की योजना बना रहे हैं तो अगला हफ्ता आपके लिए बेहतर होगा।
अगले हफ्ते जो आईपीओ आने वाले हैं उनमें 7 सितंबर को प्रणव कंस्ट्रक्शन का 351 करोड़ रुपये का है । 8 सितंबर को ग्लासवाला 428 करोड़ का परसोल केमिकल का 500 करोड़, कनोहर का 1055 करोड़ रुपये का इश्यू आएगा। 9 सितंबर को मणिपाल मेपेंट का 805 करोड़ का, स्टीम हाउस का 414 करोड़ का, एलसीसी प्रोजेक्ट का 427 करोड़ का, करमतारा का 875 करोड़ का, रेंटोमोजो का 1255 करोड़ का आर्सिल का 732 करोड़ का इश्यू शामिल है। 10 सितंबर को 210 करोड़ का वीगालैंड का आईपीओ आएगा।
जुलाई में एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट जैसे बड़े आईपीओ के बल पर प्राथमिक बाजार में रिकॉर्ड रकम जुटाई गई थी और अब सितंबर में भी इसमें जबरदस्त तेजी देखने को मिल सकती है। भले ही ज्यादातर आईपीओ ने अच्छा रिटर्न नहीं दिया है, फिर भी आईपीओ की भारी मांग है।
जुलाई कैलेंडर वर्ष का सबसे शानदार महीना रहा, जिसमें इंडो-एमआईएम और लोहिया कॉर्प जैसी कंपनियों के जरिये करीब 20,100 करोड़ के आईपीओ आए। लेकिन बाजार के आगामी आईपीओ के अनुमान बताते हैं कि सितंबर में यह आंकड़ा आसानी से पार हो जाएगा।
घरेलू नकदी की मजबूत स्थिति और बाजार में आने वाली कंपनियों के बड़े आकार और बेहतर गुणवत्ता से अच्छी मांग को मदद मिलनी चाहिए। अगस्त में निवेशकों की दिलचस्पी स्पष्ट दिखी, जब 10 आईपीओ को 100 गुना से ज्यादा आवेदन मिले। यह 2006 के बाद से किसी एक महीने में ऐसे निर्गमों की सबसे बड़ी संख्या रही।
प्राइम डेटाबेस के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2026 में सूचीबद्ध 59 कंपनियों में से केवल 22 ने ही निवेशकों को सूचीबद्धता पर शुरुआती उछाल से कहीं ज्यादा रिटर्न दिया। सेडेमैक मेकाट्रॉनिक्स 7 फीसदी की बढ़त के साथ 1452 रुपये पर बंद हुई थी, लेकिन आज यह 2905 रुपये पर कारोबार कर रही है, जो इसकी सूचीबद्धता कीमत से लगभग 94 फीसदी ज्यादा है।
मौजूदा कैलेंडर वर्ष में मुख्य प्लेटफॉर्म पर आईपीओ के जरिये जुटाई गई कुल पूंजी 74 इश्यू के साथ 80,699 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुकी है। इसमें से 38,693 करोड़ रुपये नई पूंजी के तौर पर जुटाए गए हैं जबकि 42,005 करोड़ रुपये ऑफर फॉर सेल से आए हैं। इससे कॉरपोरेट विस्तार की जरूरतों के साथ-साथ प्राइवेट इक्विटी के लगातार निकासी का भी पता चलता है।

